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भावस्पन्दन: एकत्व हमारा

प्रेम के दिव्यत्व की अनुभूति आध्यात्मिक होती है। एकत्व का यह भाव भौतिकता से परे होता है। प्रेम के एकत्व पर चैतन्यपूजा में नई कविता 'एकत्व हमारा'। इस कविता की प्रेरणा हमारे फोटोब्लॉग कृष्णमोहिनी पर पोस्ट किया डिजिटल पेंटिंग है।  इस पेंटिंग का विषय 'एकत्व - टुगेदरनेस' ही है। कला के रूप भिन्न भिन्न हो तो भी मूलतः कला का स्वरुप एक ही होता है चाहे वह पेंटिंग हो या काव्य, या संगीत।

भावस्पंदन: अटूट रिश्ता

आशादीप

मंथन: देवी मां के भक्तों ने फेमिनिस्ट क्यों होना चाहिए।

क्षणिका: मीठी यादोंमें

सर्वमान्य और सर्व-स्वीकृत अटल

भावस्पन्दन: अटलप्रवाह

प्रार्थना: अर्पित

व्यंग: नेताओं की फकीरी

कविता: छांव यादों की...

भावस्पंदन: नयनाभिराम

भावस्पंदन: मुक्ति है मनोलय

स्तोत्र: जीवनानुबन्ध