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प्रार्थना: मनमंदिर में बसे प्रभु तुम

महाशिवरात्रि के पावन पर्व निमित्त सदा योगसाधना में रमे भगवान शिव को समर्पित प्रार्थना। संत ज्ञानेश्वर ने लिखा है कि आज भी भगवान शिव स्वयं भगवान होकर भी साधना पथ पर चल रहे हैं।
मनमंदिर में बसे प्रभु तुम
अब कौनसे मंदिर मैं जाऊं
बिल्वपत्र नहीं पूजा में
भावपुष्प पूजा में लाऊ

प्रार्थना: अर्पित

व्यंग: नेताओं की फकीरी

कविता: छांव यादों की...

भावस्पंदन: नयनाभिराम

भावस्पंदन: मुक्ति है मनोलय

स्तोत्र: जीवनानुबन्ध

श्वासयज्ञ: भाव चिंतन

साधनास्तोत्र: श्वासयज्ञ

कविता: तुम ही तुम हो

कविता: सांसों का सुकून

कविता:इम्तिहान-ए-इश्क

कविता: आइना

कविता: एक रूह