संदेश

Featured This Week

वेदना: क्या हम वास्तव में देवी माँ की पूजा करते हैं?

आज नवरात्रि के आंठवे दिन नारी के रूप में विराजमान भगवती माँ और महिला समस्याओं पर एक वेदना। कल स्त्री के रूप में विराजमान भगवती पर अंग्रेजी में कविता Do we really worship Devi Maa? लिखी थी, उसीका यह हिंदी रूपांतरण है। देवी माँ की पूजा में हमारी प्रमुखता माँ की मूर्ती रूप में अर्चना, उसके संबंधी विधीविधान और उपवास  आदि पर होती है। लेकिन, हमारी भक्ति तभी पूर्ण होगी जब हम महिलाओं पर हो रहे अत्याचार, भ्रूणहत्या और स्त्री-पुरुष समान अधिकारों के लिए निश्चित ध्येय के साथ ठोस काम आरम्भ नहीं करते।

यह केवल कविता नहीं ह्रदय की वेदना है।
क्या हम वास्तव में देवी माँ की पूजा करते हैं?
किस रूप में?
किस किस रूप में?
माँ, बहन, दोस्त, बेटी, पत्नी, एक स्त्री?
क्या हम उसकी पूजा करते हैं?
क्या हम स्त्रीत्व की पूजा करते हैं?

मंथन: देवी मां के भक्तों ने फेमिनिस्ट क्यों होना चाहिए।

क्षणिका: मीठी यादोंमें

सर्वमान्य और सर्व-स्वीकृत अटल

भावस्पन्दन: अटलप्रवाह

प्रार्थना: अर्पित

व्यंग: नेताओं की फकीरी

कविता: छांव यादों की...

भावस्पंदन: नयनाभिराम

भावस्पंदन: मुक्ति है मनोलय

स्तोत्र: जीवनानुबन्ध

श्वासयज्ञ: भाव चिंतन

साधनास्तोत्र: श्वासयज्ञ

कविता: तुम ही तुम हो