01 मार्च 2018

भावस्पंदन: नयनाभिराम

रात के साढ़े ग्यारह बजे हमारी बस मुंबई से धुले की ओर चल पड़ी । बस  धीरे धीरे शहर को छोड़कर हाईवे पर आते ही  अपनी रफ़्तार तेज करने लगी। दो दिन मुंबई की अपरिचित भाग दौड़ से छूटकर अपने शांत धुले की ओर मेरा मन बस के साथ साथ तेजी से चलने के बजाय अभी भी भगवान स्वामीनारायण के मंदिर में  ही रुका हुआ था। शांत, अविचल। भगवान की अति सुन्दर मूर्ती और मैं।