26 दिसंबर 2015

कविता: इन्सान खिलौनों की तरह चावी से नहीं चलते

मानवी मनका अहंकार ऐसा होता है कि जब रिश्ते कमजोर होने लगते हैं तो उसका कारण ढूंढने के बजाए वह इन्सान को एक के बाद एक और गलतियां करने पर मजबूर करता है 

भावनाएं बाजारों में
थोक में नहीं मिलती
रिश्ते बहुत खास होते हैं

24 दिसंबर 2015

कविता: शब्दों से खिलती माला

एक कविता लिखने के बाद उसीसे प्रेरीत होकर दूसरी कविता का जन्म होता है  इस भाव पर कुछ दिनों पहले मराठी कविता लिखी थी, "शब्दांत शब्द गुंफत जाती" वही कविता आज हिंदी में


शब्दों से शब्द खिलती माला बनते हैं
सपनों से नए सपने जन्म लेते हैं

16 दिसंबर 2015

कविता तुम्हारे हृदयमें रहनेवाली

कल नई कविता क्या लिखूं मैं सोच रही थी और कुछ पल के लिए लगा कि आज तो कुछ नहीं लिखा जा रहा. तभी मेरी कविता ने मुझसे बात की और मुझे प्रेरित किया लिखने के लिए...

13 दिसंबर 2015

कविता: मन से ही पुकार लो एक बार

भगवान की भक्ति में, भगवान के लिए की जानेवाली छोटी से छोटी बात भी वे बहुत प्रसन्नता से स्वीकार करते हैं और अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं. भगवान के इस कृपालु स्वभाव पर कविता...'मन से ही पुकार लो एक बार'

07 दिसंबर 2015

क्या असहिष्णुता पर बहस विपरीत दिशा में खीचीं गई?

चेन्नई में बारिश और बाढ़ से हजारों लोग जब फंसे हुए थे तब संसद में असहिष्णुता पर चर्चा चल रही थी चेन्नई में बारिश की स्थिति एक दिन में ही तीव्र नहीं हुई थी, पर फिर भी असहिष्णुता पर चर्चा करना सांसदों को (और हम सबको भी) ज्यादा आवश्यक लगा चर्चा से कुछ राष्ट्रहित में समाधान निकले तो उस चर्चा का उपयोग है संसद की चर्चा को देखते हुए लगा कि ये चर्चा अलग दिशा में आगे बढ़ रही है इसी विषय पर आज का आलेख 

04 दिसंबर 2015

महंगाई के राजनैतिक फायदे: तुअर दाल का साइड बिजिनेस

अरहर या तुअर की दाल के बढ़ते दामों के बीच महाराष्ट्र में ९९ रूपए प्रति किलोग्राम दाल भाजप के स्टाल से मिल रही थी दिवाली के तोहफे के रूप में ये दाल या तोहफा 'खरीदने' का मौका 'जनता' को मिला। सत्ताधारी पक्ष के इस व्यावसायिक निर्णय पर आज के आलेख में कुछ प्रश्न