26 मई 2016

भ्रामक अच्छे दिनों की वास्तविकता

एक बहुत बड़े भ्रम और काल्पनिक आनंद का यथार्थ विश्लेषण करना कुछ हद तक असंभवसा काम है। 'अच्छे दिन' एक काल्पनिक आनंद का ही नाम है। भारतीय जनता पार्टी के दो वर्ष के कार्यकाल और अच्छे दिनों के प्रचार की वास्तविकता पर विश्लेषण।

23 मई 2016

व्यंग: देशभक्त की पुकार – मन की बात मिले हर दिन बार बार

कल 'मन की बात' सुनने का सौभाग्य फिर एक बार जीवन में आया 'मन की बात' सुनकर मन भरता ही नहीं 

10 मई 2016

व्यंगकथा: डीग्री मिलेगी कहीं, १०-१० में चार?

आज की प्रस्तुति एक व्यंगात्मक लघुकथा। हमारी कथा के नायक हैं, अजित मंत्री। इनका उपनाम 'मंत्री' है, इसलिए अकड़ भी वैसी ही, अपने आपको मंत्री ही समझते हैं। अजित साहब की सबसे खास दो बाते हैं, ये बहुत अच्छा भाषण देते हैं (उनके हिसाबसे), और इन्हें अभिनय भी बहुत पसंद है। सुनने का अभिनय जब भी करते हैं, वाकई ध्यान से सुन रहे हैं, ऐसा लगता है। इनकी जिंदगी बड़ी ही हैपनिंग है।

07 मई 2016

स्तोत्र: प्राणाधार रामरक्षा

आजका काव्य रामरक्षा स्तोत्र को अर्पित है

कवच और रामरक्षा स्तोत्र: 

हम ईश्वर की अनेकों रूपों में आराधना करते हैं इन रूपों की स्तुति और प्रार्थना के लिए अनगिनत स्तोत्र पुराणों में और आधुनिक समय में आदि शंकराचार्य जैसे महान योगियोंने भी गाएं हैं