आशादीप

निराशा के अंधकार में डूबे हुए 
मनों में आओ आशाओं के दीप जलाएं
प्रकाश तो खुदमें ही था
हमेशासे
बुझे हर मनको आओ फिरसे बताएं

Text image for the poem Aashadeep


मन जरा बुझा पर प्रकाश तो नहीं 
अंधकार मात्र आभासी है 
आशा लेकिन अमिट है 
नई आशाओं का प्रकाश आज मिलकर 
हर ओर फैलाएं
आओ, आशाओं दीप आज जलाएं 


चैतन्यपूजा की ओरसे आप सभीको दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

।।शुभ दीपावली।।



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