17 जुलाई 2012

इस पल को थाम लेतें हैं


हम कभी कभी बहुत उदास हो जातें हैं, दु:खी होतें हैं, रोने का मन करता है पर आसूँ भी नहीं आते| फिर हम जीवन में कोई परिवर्तन लातें हैं, कुछ बदलाव हमारी आदतों में, कुछ समय हम अपने आप के लिए देतें हैं| आज कल हम दुनिया से बहुत दूर चलें गएँ हैं| हमें बस् अकेले रहना हैं, और अपनी भावनाओं को, अपने जीवन को समझना है| |

हम ऐसे बिना बताएँ गायब हो जातें हैं, तो हमारे सुहृदों को बड़ी चिंता होने लगती है| हम किसी समस्या में फसे हो, तो बात नहीं कर पाते| पर आजकल तय किया है, आप सबको चिंता न हो इसलिए हम ब्लॉग पे तो मिलते ही रहेंगे और कभी कभी हालचाल भी बताया करेंगे|||||

09 जुलाई 2012

मुस्कान के आसूँ ...

जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होतें हैं, कुछ लोग ऐसे मिलते हैं, मानो कोई भ्रम हो, केवल एक भ्रमजाल ! पर इस भ्रम जाल में फसकर हम अपनी मुस्कान और भोलापन न खो बैठे इसलिए यह काव्यपंक्तियाँ

एक भोलिसी मुस्कान ने एक छलावे के लिए लिखी ...
छलावा तो छलावा है, कभी नहीं समझेगा पर मुस्कान को तो अपने आसूं लिखने थे,  बस् यह काव्य वही आसूं है,      मुस्कान के आसूँ ..