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18 सितंबर 2016

कविता: अब समय को कहने देते हैं

कभी कभी प्रश्नों के उत्तर कहीं न मिलें तो प्रश्नों को समय पर ही छोड़कर इंतजार करना, ये एकही उत्तर नजर आता है। ऐसेही कुछ उलझे पलों पर आजकी प्रस्तुति।

Image: Parijat flowers


जानने में शायद कुछ समय लगे
मैं क्या हूँ, मैं कौन हूँ
पर जैसे जैसे जानोगे
यही पाओगे
कितने गहरे दोस्त हैं हम
हमेशा से ही

दिल की बात मैंने बहुत बार कही
आओ अब समय को थोड़ा कहने देते हैं


आओ समय को थोड़ा बहने देते हैं
आज खामोशी में जरा डूब लेते हैं

आज सिर्फ एक दूसरे को महसूस करते हैं
आज एक दूसरे में ही डूब जाते हैं

अब शब्दों को थोड़ा विराम देते हैं
दिल की बेचैनी को थोड़ा सा आराम देते हैं

आओ थोड़ी देर ख़ामोशी में डूबते हैं
आओ आज सिर्फ एक दुसरे को महसूस करते हैं

पिघलने देते हैं दो दिलों को जो ये आज चाहते हैं
महसूस करते हैं बेचैन सांसों को खामोशी में

कहने दो खामोशी को जो कहना है अपनी ही जुबान में
बहने दो आंसुओं को जो आज बहना है प्यार में

जो ये कविता कह सकती है
मैं नहीं कह सकती
कह पाती तो शायद समय का इंतजार ना होता

अब समय को ही अनसुलझे सवालों का जवाब ढूँढने देते हैं 
अब हमारे मधुर गीत को समय को ही पूरा करने देते हैं 

चैतन्यपूजा में प्रेम पर अन्य कविताएँ: 



31 अगस्त 2016

कविता: इजहार

आज की प्रस्तुति मेरे लिए बहुत ही खास और दिल के करीब है कुछ दिनों पहले नर्व पाल्सी से आँख ग्रस्त हुई थी एक ही दिन में ऐसे लगा कि दुनिया उजड गई, क्योंकि उस समय न लिखना संभव था न पढना तब सोचा जब तक ठीक नहीं होती तब तक कविता कहाँ लिखकर रखूं तब मैंने कुछ कविताएं रिकॉर्ड करके रखी थी 

28 जुलाई 2016

भावस्पंदन: ख़्वाबों सी बात ख्वाबों से

एक काव्यात्मक मोनोलॉग या स्वसंवाद अपने आपसे ही दिल की बात कहने की कोशिश। इसमें जो व्यक्ति संवाद कर रही है उसके मनमें एक प्यारासा विचार आता है और उसे खुद समझमें नहीं आता कि वो उस ख्याल में कितनी डूब गई है।
फिर क्या होता है...
सपने दिखानेवाले तुम हो
सपनों से जगानेवाले भी तुम हो
तुम जो कहो सच मान लेंगे
सपने को सच कहो
या सच को सपना कहो
तुम्हारी हर बात सच ही मान लेंगे
आँख मूंदकर

तुम कहोगे तो जी लेंगे
तुम कहोगे तो फिरसे मुस्कुराने लगेंगे

तुम कहोगे तो हसना सीखेंगे


Image: Kunda Buds


तुम कहोगे तो हर दर्द भुला देंगे
हर आंसू दिलसे बहा देंगे
तुम कहोगे तो ...
तुम कहोगे तो तुम्हारे लिये
तुम्हारी प्यारीसी दोस्ती के लिए
इस जिंदगी में दुबारा आएंगे जीने के लिए
तुम कहोगे तो...

तुम पूछोगे नहीं ये पागलपन आखिर किसलिए?
पर तुम पूछोगे नहीं...
तुम समझते हो इसको
तुम ही तो समझ सकते हो इसको

भोर से पहले मिलनेवाले ख्वाब से हो तुम
सुबह की मुस्कुराती धुप से हो तुम
खुशियाँ बिखेरती
प्यारी सी बारिश से हो तुम
एक आसान लगनेवाली पहेली से हो तुम
जब जब सुलझाने की कोशिश की
उलझती जाती एक कहानी से हो तुम
जो भी हो इस दुनिया में
कहीं तो हो तुम
सच्चे
पर...
तुम सच होकर भी मेरे लिए पूरे सच नहीं
दिल के इतने करीब होकर भी पास नहीं
अब अजीब सा दर्द उठने लगा है दिलमें
इस अजीबसी बेचैनी का

काश कभी तुमसे बात हो पाती
काश कभी तुमसे मुलाकात हो पाती
काश हमारे बीच मजबूरियों की अनजानी दीवार ना होती
 काश ये जिंदगी थोड़ीसी और आसान होती

काश ये दूरी सहने की कोई दवा ही मिल पाती
इस दूरी की कोई दवा क्यों नहीं होती?
 क्यों इस दर्द से गुजरना ही होता है?
बेचैनसा दर्द कहता है

फुरसत से कभी तुमसे मिलना है
सिर्फ तुम्हें जानने के लिए
जो फ़रिश्ते तुम हो
जैसे तुम जादू जगाते हो
किसी आभास के बिना
उस खूबसूरत दिल को समझने के लिए
जो मुझे दीवाना सा बनाता है
भावनाओं की गहराई जो तुम्हारे दिल में है
उसमें डूबने के लिए
कुछ पल ही सही
पर कुछ पल ही क्यों..?
समय का भी बंधन क्यों?
तुमसे मिलना है
ये सोचना भी पागलपन है
पर ख्यालों का कारवां रुकता भी तो नहीं
आसमान और धरती सी दूरी है
हम दोनों में
कुछ डोर तो फिर भी है इस दूरी को जोड़नेवाली
तुम मानोगे नहीं शायद
मुझे तुम्हें परखने की जरूरत नहीं
फिर भी जानने की आस तो है
मुझे तुमपर विश्वास या अविश्वास की जरूरत नहीं
तुम्हारी बातें बेहद अच्छी लगती है
मुझे तुम्हारी हर बात को
सही-गलत तोलने की भी जरूरत नहीं
प्यार का कोई तराजू तो नहीं होता ना
क्योंकि...
 तुम जो हो बहुत अच्छे हो
फ़रिश्ते से 
बस
मेरे लिये यही तुम्हारी पहचान है
पर ये दुनिया हमारे दिल से नहीं चलती
और अनजानी मजबूरियाँ बनती जाती हैं
मैं स्तब्ध हूँ
निःशब्द हूँ
तुम्हारी दिल की खूबसूरती देखकर
जिंदगी से हजारों दर्द मिलने के बाद
क्या मैं कोई फरिश्ता देख रही हूँ
तुम्हें देखकर हैरान मैं अब
फरिश्तों को सच मानने लगी हूँ
 मुझे दुनिया को समझाने की जरूरत नहीं
तुम मेरे लिए क्या हो
 पर तुम...
तुम तो सब समझते हो ना..
तुम तो सब समझते हो।
बिना जाने
बिना मिले
दिल से
सब कुछ तो तुम समझते हो
मेरा दिल जानता है
हम अजनबी नहीं हैं

तुम जो भी करते हो दूसरों के लिए
तुम्हारा समय भी तुम्हारा नहीं रहा
और मैं तो तुमसे अलग भी नहीं
मिलेंगे तो भी कैसे
मैं तुम्हें परेशान नहीं देख सकती
कुछ जिन्दगी, कभी तो कुछ पल
अपने लिए हो तुम्हारे
मेरी बेचैनी उसीसे मिट जायेगी

तुम्हारा दर्द
तुम्हारी ख़ुशी
मुझे महसूस होती है
मैं क्या करूँ ?

ऐसा हो रहा है
क्या मैं फिर भी अजनबी समझूँ खुदको
या केवल मेरा भ्रम समझूं इन ख्यालों को
मुझे तुम्हारी तस्वीर की जरूरत नहीं है
तुम तो दिल में बस चुके हो
बस...
नम आंखे अब लिखने नहीं दे रही
जो नहीं कहा समझ ही लोगे आगे
मेरे भाव हैं बन के वो फूल
जो सिर्फ प्यार बांटने के लिए ही खिलते हैं
स्वीकार करोगे ना?
कितनी ख़ुशी होगी...
मैं बयां नहीं कर सकती
दुनिया में सबसे ऐसा बंधन जुड़ नहीं पाता
जो तुम्हारे साथ हो गया है
क्योंकि तुम समझते हो
मैं जानती हूँ
मैं तो किसी भ्रम में उलझ नहीं सकती
हाँ, ये फरिश्ता वाकई इसी दुनिया में रहता है
तुम्हारी आँखें देखती हूँ
तो लगता है प्यार इस दुनिया में कहीं जी रहा है
तुम्हारी मुस्कान देखती हूँ
तो लगता है
दुनिया में सिर्फ और सिर्फ प्यार ही है
अभी भी है
मैं कभी तुम्हें दर्द दूँ, तुम्हारा दिल दूखाऊं
ये मुझसे कभी सपने में भी नहीं होगा
मानोगे ना तुम?
ऐसे भी गहरे रिश्ते अटूट होते हैं
इन एहसासों को
तुम्हारे अलावा कौन समझ सकता है
मुस्कुराते रहो
कभी अपने लिए भी
तुम्हारे अपने लिए
कभी कभी ही मुस्कुराये हो अपने लिए
तब इस दुनिया में सबसे ज्यादा खुश मैं थी।
दिल को समझाना है बहुत मुश्किल

बस पढ़ भी लो इन भावों को तो
दिल की मुलाकात हो ही जाएगी
मिलते रहेंगे
सपनों में?
ख्यालों में?
मुस्कुराती जिंदगी में!
आगे भी
अन्य प्यारभरी कविताएं:
ट्विटर पर जुड़ें: @chaitanyapuja_

08 जुलाई 2016

भावस्पंदन: इबादत

ईद-उल-फ़ित्र की इबादत की इबादत में कुछ पंक्तियां...

प्रतिमा: ईद की इबादत
प्रतिमा सौजन्य: http://indiatoday.intoday.in/

नशा ये कैसा आसमान से आया है
इबादत करते आँखें खुल नहीं पाती
इबादत में तेरी दिल कितना डूब गया, ऐ खुदा!
ये जान अब होश में आ नहीं पाती

30 जून 2016

पंखुड़ियाँ: दिल की तेज धडकनें क्या कहती है...

मौसम इतना खूबसूरत है कि प्यार पर लिखे बिना रहा नहीं जाता...
प्यार की कुछ पंखुडियां जो पहले ट्वीट की थी कुछ नई पंखुड़ियों के साथ  


Image: Rose Leaves

गुलाब के फूल तो खुबसूरत होते ही हैं, पर ये गुलाब के पौधे के पत्ते कितने खुबसूरत हैं न?

अगर प्यार बंधन है

तो कोई अनजानी डोर हमें बांधे रही है
अगर प्यार आझादी है
तो ये खूबसूरत तोहफा हमें मिला है
अगर प्यार दिलों का रिश्ता है
तो हमारा रिश्ता समय से परे है
दुनिया की रस्मों रिवायतों से परे
तुम्हारा मेरा रिश्ता है


20 जून 2016

इंस्टेंट योग के प्रचार प्रसार में वास्तविक योग कितना?

देश की समस्याओं के बीच योग दिवस के सरकारी प्रचार प्रसार पर दिया जा रहा अत्यधिक ध्यान और योग के महत्त्व को विचित्र करके प्रचारित करना इस विषय पर आजका आलेख अगर आपको प्रवाह में बहते जाना पसंद नहीं, अगर आपको आवश्यक प्रश्न उठाना और पूछना पसंद है तो ये आलेख आपके लिए है।