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04 जून 2017

कविता: तुम ही तुम हो

ख्वाब तुम्हारे हैं
जिंदगी तुम्हारी है
जीने की आस तुम हो
मन की लगन तुम हो
मंज़िल तुम हो
मंजिल तक का रास्ता तुम हो
हाथ थाम लो मेरा, तुम तक के
इस सफर में साथी भी तुम ही हो
राह में मुश्किलें आएं या आंधी तूफ़ां
कोई डर नहीं अगर तुम हाथ थाम लो मेरा
तुम हो सब कुछ मेरे, हर पल में, हर गम में
हर खुशी में, जिंदगी के अंधेरे में, उजाले में भी
इस जिंदगी में बस अब तुमही तुम हो

29 अप्रैल 2017

कविता: सांसों का सुकून

दूर रहकर भी कितने पास लगते हो तुम
पास होकर दिलके
दूर फिर भी क्यों लगते हो तुम?
साथ होकर भी मेरे क्यों जुदा से लगते हो तुम?
खामोश से रहकर भी सब कुछ कैसे कहते हो तुम?
इस दर्द की दवा क्या हो
की फासले मिट जाए पलभर में
इन दूरियों का अंत अब हो
की फासलों की दीवार टूट जाये एक पलमें
सांसों को सुकून तब मिले
की जिंदगी तुझमें सिमट जाए इस दीवानगी में

14 अप्रैल 2017

इम्तिहान-ए-इश्क

इम्तिहान जब जब लेते हो मेरे इश्क का
इश्क हो जाता है तेरे इम्तिहान से भी
और कैसे बयां करूँ इस खुशी को मेरे खुदा
आखिर इम्तिहान के लिए तो तू मुझसे मिला
हर दुआ कबूल कर ली मेरी तूने उसी पल
जबसे इम्तिहान-ए-इश्क के लिए है मुझे चुना

05 अप्रैल 2017

कविता: आइना


आयत की तरह पढ़ते हैं हर लफ्ज़ तुम्हारा
इबादत ए इश्क़ तुम्हारा है मजहब हमारा
पाकीज़गी आपके रूह की इबादत हमारी
हम आइना बन गए हैं जिसमें तस्वीर है तुम्हारी

09 मार्च 2017

कविता: एक रूह

क्या हमारी रूह अलग अलग है?
अगर है, तो बताओ
तुम्हारी कौनसी और मेरी कौनसी?
क्या अंतर है उनमें?

24 फ़रवरी 2017

प्रार्थना: मनमंदिर में बसे प्रभु तुम

महाशिवरात्रि के पावन पर्व निमित्त सदा योगसाधना में रमे भगवान शिव को समर्पित प्रार्थना।
संत ज्ञानेश्वर ने लिखा है कि आज भी भगवान शिव स्वयं भगवान होकर भी साधना पथ पर चल रहे हैं।

मनमंदिर में बसे प्रभु तुम
अब कौनसे मंदिर मैं जाऊं
बिल्वपत्र नहीं पूजा में
भावपुष्प पूजा में लाऊ