संदेश

कविता: कदमो में है जहाँ तुम्हारे

एक आसूँ भोलासा

अगर तुम न होते 'दीपक'

'सिमरन'

नव वर्ष लाया नव आल्हाद !

प्रेमाभक्ती - एक नयी अभिव्यक्ती

श्यामा श्याम प्रेम गीत

होली खेली आज कान्हा संग

मीरा बनू मै राधा बनू

नमस्ते नमस्ते प्रभो लोकनाथ |

और भी कुछ अच्छा लगता है ............

सत्ता प्रजा की है कौनसी ?

विरहवेदना

अक्षय पात्र - आयीये बच्चो को खाना खिलाये! और उन्हे पढ़ायें

कुछ अच्छा लगता है .............