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14 अप्रैल 2017

कविता:इम्तिहान-ए-इश्क

इम्तिहान जब जब लेते हो मेरे इश्क का
इश्क हो जाता है तेरे इम्तिहान से भी
और कैसे बयां करूँ इस खुशी को मेरे खुदा
आखिर इम्तिहान के लिए तो तू मुझसे मिला
हर दुआ कबूल कर ली मेरी तूने उसी पल
जबसे इम्तिहान-ए-इश्क के लिए है मुझे चुना


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ट्विटर: @Chaitanyapuja_

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