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09 मार्च 2017

कविता: एक रूह

क्या हमारी रूह अलग अलग है?
अगर है, तो बताओ
तुम्हारी कौनसी और मेरी कौनसी?
क्या अंतर है उनमें?

क्या रूह का रूप अलग होता है,
या रंग,
या नाम?
इस आग में ये कौन जल रहा है
वो रूह किसकी है
जलकर भी कौन जी रहा है
मरकर भी कौन जी रहा है
वो रूह किसकी है
वो अनसुनी सिसकी
वो किस रूह की है
तुम्हारी या मेरी?
क्या हमारी रूह अलग अलग हैं?
किसीने रूह को जलाया है
वो दर्द क्या है?
जो जल रहा है, वो क्या है?
बताओ, क्या तुम्हारी और मेरी रूह अलग अलग है?
क्यों ज़ख्म तुम्हारे रूह को होती है
दर्द मुझे होता है
क्यों दर्द तुम्हें होता है
और आंसू इन आँखों से बहते हैं
बताओ, क्या हमारी रूह अलग अलग है?


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ट्विटर: @chaitanyapuja_