Search

22 मार्च 2015

कविता: क्यों जिन्दगी बन गई है इतनी मुश्किल?

प्रेमी से बिछड़ने के दर्द पर कुछ छोटी छोटी कलियाँ, पंखुड़ियाँ   



Image: White wild flower



वो नीम का पेड़ 
और मैं 
सोचते रहतें हैं 
तुम्हारे बारे में 
'हमेशा'!

~~~o~~~

तुम्हारी यादों की महक
लाती है यह 
बहती हवा 

~~~o~~~

क्यों लिखती हूँ 
बार-बार
तुम्हारे बारे में 
तुम ठीक तो हो?

~~~o~~~

कलियाँ, फूल और मैं 
सब रहतें हैं उदास
तुम्हारी याद में 

~~~o~~~

पंछियों से पूछती हूँ 
तुम्हारा सन्देश 
वो भी चुपचाप 
तुम्हारी तरह 

~~~o~~~

कविता में ढूँढती हूँ 
तुम्हारा मन 
बिलकुल खामोश 
हमारे प्यार की तरह 

~~~o~~~

खुबसूरत दुनिया
बन गई है अजनबी
तुम्हारी यादों में 
जबसे हूँ खोई 

~~~o~~~

बादल दिखतें ही 
दौडके पूछती हूँ
क्या तुम उसके शहर से आए हो?
बादल भी खामोश 
तुम, मैं और हमारा प्यार 
भी खामोश 

~~~o~~~

ये चंचल हवा तो 
इतनी बुरी नहीं थी
ठहरसी गई है
चुपचाप 
क्यों आज?

~~~o~~~

कलियाँ भी मुरुझा गई 
खिलने से पहले 
जैसे मेरी मुस्कुराती आँखें 
उदास हो गई 
तुम्हारी यादों में  

~~~o~~~

लोगों ने  पागल ही समझा है 
गम प्यार में पागल होने का नहीं 
तुम मेरे जैसे पागल क्यों नहीं 
दर्द यही है 

~~~o~~~

मैं तो फिर भी 
लिखती हूँ अपना दर्द 
तुम्हारा हाल 
तो पता कैसे चले?

~~~o~~~


ये धूप 
तुम्हारी यादें
और विरह 
क्यों जिन्दगी बन गई है 
इतनी मुश्किल?

~~~o~~~


विरह के दर्द पर और कविता:

तुम्हारे बिना 



4 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. मनीषजी चैतन्यपुजा में आपका स्वागत| आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद| :-)

      हटाएं
  2. प्रेम की यादें पुरानी हो कर भी महकती हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. दिगंबर नासवाजी बहुत बहुत धन्यवाद आपकी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए| :-)

      हटाएं