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10 मई 2015

कविता: चलते रहना है तब तक

आज हमारे पास खुशियाँ मनाने के दो कारण हैं सोचिए सोचिए..! चैतन्यपुजा की यह १०० वी पोस्ट है और चैतन्यपुजा वेब साईट का पता अब चैतन्यपुजा डॉट कॉम (chainyapuja.com)है है न ये ख़ुशी मनाने वाली बात? आज की खुशियों के नाम ही है आज की कविता: "चलते रहना है तब तक"


चैतन्यपुजा की एक -एक कविता में मेरे प्राण है इन कविताओं के लिखते समय मेरी भावना सिर्फ कुछ लिखना या साहित्य में कुछ कर पाना यह नहीं है यह तो साधना है इस ब्लॉग का तो नाम ही चैतन्य की पूजा है और यह सफ़र बिलकुल वैसा ही है...ईश्वर के हर रूप की पूजा है इसमें, अन्याय के विरुद्ध आक्रोश है, ज्ञान का प्रकाश है, भक्ति की ज्योत है और कृष्ण का प्रेम..मानवी मन के अलग अलग रंग – बहुत सूक्ष्म रंग, यह सब कुछ इस पूजामें  हैं

यह सब गुरूदेव की कृपा के बिना संभव नहीं ब्लॉगिंग के कारण मैं आप सबसे मिल पाई हूँ यह उसी भी गुरुकृपा का ही रूप है

मेरे लिए यह बहुत ख़ुशी की बात है कि आप मेरे प्रयासों को पढतें हैं; उन्हें सराहते हैं। और इससे मुझे पता चलता है कि मेरी जिम्मेदारी क्या है आगे लिखना तो बहुत है...मेरा यह प्रयास है कि और भी अनछुएँ विषयों को छुआ जाए और गहरी अनुपम प्रेम से सजी कविताओं में हम सब डूब जाएँ  हमारी प्राथमिकता आरम्भ से ही आध्यात्मिक विषय और जिससे मन को कुछ सुकून मिले ऐसा लिखने की है और आगे भी ब्लॉग का स्वरुप वैसा ही रहेगा  

एक पड़ाव तक पहुँचने की ख़ुशी मनाते समय ही हमारी नजर आगे के लक्ष्यों पर केन्द्रित होने लगती है आगे के सफ़र के लिए कुछ पंक्तियाँ ...

राह आसान है या मुश्किल
चिंता यहाँ किसे है
जब चलने का जूनून है सर पे 
तो मंजिलें अब दूर ही कितनी है
पंख अपने ही जूनून के
लगा कर अब उड़ना है
यश-अपयश जो भी हो सामने
नई मंजिलों को ढूंढ़ते
अविचल बस चलते रहना है

मुश्किलें आएं रास्तों में
या रास्ता ही टूट जाए
साथ न हो जब किसी का
या अँधेरे का डर सताए
फिर भी चलते रहना है तब तक
जब तक अँधेरा न खुद से डर जाएँ
संघर्ष की आग में तपते
रहना है तब तक
जब तक मन खुद सूरज न बन जाएं

चलते रहना है तब तक
जब तक यह रास्ता न थक जाए
जब तक मंजिले भी हार कर कह न दे,
अब आगे क्या है पाना तुम्हे?
रास्ता तो यहीं तक है
नए रास्ते बनानें हैं फिर  
नई मंजिले बनानी है
नए आव्हानों के साथ
फिर नई जिन्दगी बनानी है
चलते रहना है तब तक...

यह सब करना तो है लेकिन आपको वादा करना पड़ेगा..कि आप साथ देंगे... देंगे न? ...:)

मेरे प्रयासों के लिए आपका जो प्यार है, उसके लिए मैं आभार व्यक्त नहीं करूंगी क्योंकी पिछले लगभग पांच वर्षों में हमारा इतना लगाव हो गया है कि अब औपचारिक धन्यवाद कहना शायद अजीब ही लगे 

बस..यूँही मिलते रहिएगा..