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01 जनवरी 2015

कविता: बेहाल मौसम का हाल

यह वो मौसम का हाल नहीं, जिसपर आप और हम विश्वास करतें ही नहीं |

आजकल मौसम खुद बेहाल है
फिर कैसे बताएं हमारा क्या हाल है 
दिल्ली का कोहरा
थोडा अजीब थोडा घना 
महाबलेश्वर के बादल 
जमीन को छूने के लिए बेताब 
पुणे की खुबसूरत ठण्ड 
थोड़ी थोड़ी जैसे 
अपने आप सुलझती पहेली 
लोनावले की रिमझिम 
हसती मुस्कुराती 
काली काली सडकें 
और इन सब के पीछे 
हमेशा की तरह 
थोड़ी कम थोड़ी ज्यादा 
ठंडी गरम बहती हवा...
लाती 
धुले की गरमी 

अब सोचिये क्या हाल हो रहा होगा यहाँ....मौसम तो पल पल बदल रहा है | खुद तो बेहाल है ही और हमें भी बेहाल कर रहा है | 

आपके शहर में मौसम कैसा है..?

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