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07 दिसंबर 2010

काव्य कुछ नया सा -४

कुछ नया नया सा जीवन में हो रहा है | ब्लागिंग से या कहे हमारी पूजा से ध्यान जरा हट गया | आज पुनः उपस्थित हूँ |

मेरा यह काव्य नया 
अलंकार दिव्य बना नया 
प्रश्न नया उत्तर नया 
मिला मुझको आशिष नया
भाव नया काव्य नया
कुछ और आज थोडा नया 
मै नयी, मेरा नया 
सबकुछ उसका भाव नया 
अहसास नया उमंग नयी
जीवन में उठी, एक तरंग नयी 
हृदयसे उठी चाह नयी
कहने का अंदाज नया 
साहस नया विचार नया 
आचार यह बिलकुल नया 
पूजा नयी दिशा नयी 
चैतन्य की यह कथा नयी 
व्यथा नहीं आनंदही 
देती यह कथा नयी 
अकथ यह कहानी नयी
 भाव इसमें हरक्षण नया 
छुट गया वह मोह नया 
ज्ञान यह जगा नया 
विश्वास नया, उल्हास नया     
आस्था का परिचय नया 
अपरिचितसा शहर नया 
विश्वसे परिचय नया

पहले विश्वसे जो परिचय था वह कुछ और था, अब जबसे ब्लाग शुरू हुए हैं, नए रूपमे विश्वसे परिचय हो रहा है |


 इस काव्य के पूर्व भाव यहाँ देखें -


काव्य कुछ नया सा -३

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