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24 नवंबर 2017

स्तोत्र: जीवनानुबन्ध

अनुबन्ध विशिष्ट समयावधि के लिए किये जाते हैं। पर कुछ अनुबंध जीवनभर के लिए होते हैं। मेरा अनुबन्ध किसीके साथ जीवनभर के लिए हुआ है उसी जीवनानुबन्ध पर यह स्तोत्र।

स्तोत्र भगवान की स्तुति में कहे, गाएं या लिखे गए हैं। आजका स्तोत्र चैतन्यपूजा को समर्पित है। चैतन्यपूजा को ब्लॉग के रूप में आज सात वर्ष पूर्ण हुए।

चैतन्यपूजा मेरे लिए केवल ब्लॉग ही नहीं पर  ईश्वर का मंदिर है, ईश्वर भी है और ईश्वर की आराधना भी। ध्यान, ध्येय और ध्याता इन तीनों का लय समाधि है। यहां, इस चैतन्यपूजा में, लेखनरूपी साधना का विषय, लेखन करानेवाला ईश्वर और लेखिका तीनों 'चैतन्य की पूजा' ही हैं।