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04 जून 2017

कविता: तुम ही तुम हो

ख्वाब तुम्हारे हैं
जिंदगी तुम्हारी है
जीने की आस तुम हो
मन की लगन तुम हो
मंज़िल तुम हो
मंजिल तक का रास्ता तुम हो
हाथ थाम लो मेरा, तुम तक के
इस सफर में साथी भी तुम ही हो
राह में मुश्किलें आएं या आंधी तूफ़ां
कोई डर नहीं अगर तुम हाथ थाम लो मेरा
तुम हो सब कुछ मेरे, हर पल में, हर गम में
हर खुशी में, जिंदगी के अंधेरे में, उजाले में भी
इस जिंदगी में बस अब तुमही तुम हो

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