Search

05 अप्रैल 2017

कविता: आइना

आयत की तरह पढ़ते हैं हर लफ्ज़ तुम्हारा
इबादत ए इश्क़ तुम्हारा है मजहब हमारा
पाकीज़गी आपके रूह की इबादत हमारी
हम आइना बन गए हैं जिसमें तस्वीर है तुम्हारी


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

चैतन्यपूजा मे आपके सुंदर और पवित्र शब्दपुष्प.........!