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26 दिसंबर 2016

कविता: आदत

तुम आदत बन गए हो इस दिल की
सुबह शाम दिन रात मधुर लय हर धडकन की
एक तुम्हारी आदत ने मेरी दुनिया बदल दी
एक तुम्हारी आदत ने मेरी जिंदगी बदल दी
सिर्फ पागलपन नहीं है ये, सिर्फ प्यार भी नहीं


तुम्हारी आदत है सर्वोपरि मनमें कहीं
मनकी गहरी इच्छा कहूँ या कहूँ इसे पूजा
पर तुम्हारी आदत से अच्छा नहीं कुछ दूजा
तुम्हारी आदत नहीं है केवल मेरी कविता कहानी
ये आदत बन गई है अब दीवानगी रूहानी 

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Twitter: @Chaitanyapuja_