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31 अक्तूबर 2016

कविता: रौशनी है तुमसे


दीपावली के मंगलमय पर्व पर कुछ काव्यरूपी दीपक खूबसूरत भावों की ज्योतिसे 


हर दिये की रौशनी में तुम्हारा चेहरा दीखता है
तुम्हें देखने के लिए बार बार दिये जलाने को दिल कहता है




ये हुआ है ऐसेही
तुम यही हो इस दिल में ही
और क्या बताऊं
दीखते हो हर कहीं

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तुम रौशनी में दीखते हो
या जिंदगी ही रौशन तुमसे है
तुम इन साँसों में बसे हो
और हर ख्वाब रौशन तुमसे है

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दिल में बसे प्यार का चिराग
रौशन तुम्हारे ही नाम से है
खुशियों का उजियारा जिंदगी में
बस तुम्हारे ही नाम से है

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खुशियों के दिये जले हजारों तुम रहो जहाँ
दुख का साया भी न पहुंचे तुम रहो जहाँ

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दुआ है मेरी ये रब से
मुस्कुराती रहे तुम्हारी आँखे हमेशा
प्यार ही प्यार रौशन रहे
तुम्हारे आनेवाले पलों में हमेशा

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मेरा दिल साथ है
तुम्हारे पास है
जैसे जलती ज्योति
और उसका प्रकाश है

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कुछ एहसास हैं तुम्हारे नाम के
कुछ पल खास हैं तुम्हारे नाम के
दिये बनाने हैं कुछ उन पलों के
रौशन करेंगे जो हमें प्यार के उजियारे से

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उम्मीदों का दिया मन में जलता है तुमसे
खुशियों का कारवां जिंदगी में बनता है तुमसे
प्यार की रौशनी दिलमें उजली है तुमसे
लबों पे जो खिल उठी है मुस्कान है तुमसे