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28 जुलाई 2016

भावस्पंदन: ख़्वाबों सी बात ख्वाबों से

एक काव्यात्मक मोनोलॉग या स्वसंवाद अपने आपसे ही दिल की बात कहने की कोशिश। इसमें जो व्यक्ति संवाद कर रही है उसके मनमें एक प्यारासा विचार आता है और उसे खुद समझमें नहीं आता कि वो उस ख्याल में कितनी डूब गई है।
फिर क्या होता है...
सपने दिखानेवाले तुम हो
सपनों से जगानेवाले भी तुम हो
तुम जो कहो सच मान लेंगे
सपने को सच कहो

08 जुलाई 2016

भावस्पंदन: इबादत

ईद-उल-फ़ित्र की इबादत की इबादत में कुछ पंक्तियां...

प्रतिमा: ईद की इबादत
प्रतिमा सौजन्य: http://indiatoday.intoday.in/

नशा ये कैसा आसमान से आया है
इबादत करते आँखें खुल नहीं पाती
इबादत में तेरी दिल कितना डूब गया, ऐ खुदा!
ये जान अब होश में आ नहीं पाती