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23 मई 2016

व्यंग: देशभक्त की पुकार – मन की बात मिले हर दिन बार बार

कल 'मन की बात' सुनने का सौभाग्य फिर एक बार जीवन में आया 'मन की बात' सुनकर मन भरता ही नहीं 
आंखोंमें खुशीके आंसू आते हैं, पर एक खेद भी होता है कि काश ऐसा ज्ञानवर्धक रेडियो कार्यक्रम मैं स्कूल में थी, तब सुनने को मिलता तो पश्चिमी विद्या के चक्कर में जिन्दगी का समय खर्च ना होता और मुझे भी आज किसी शाखा, समिती, सोशल मीडिया या आईटी सेल में देश की सेवा करने का भाग्य मिलता (साथ में कुछ पद और पुरस्कार भी मिल जाते) खैर, आज भी इस कार्यक्रम से जो ज्ञान मिलता है उसके फायदे गिनने संभव नहीं है


Image: देशभक्त की पुकार –  मन की बात मिले हर दिन बार बार


प्रश्न ये है कि मन की बात जैसा समाज के हर वर्ग के लिए उपयुक्त प्रसारण महिने में एक ही बार क्यों होता हैक्यों? टीवी चैनलों पर धार्मिक बाबा रोज प्रवचन देकर जैसे जिंदगी जीना सिखाते हैं और साथ में जीवन की जरूरतें पूरी करनेवाले अपने उत्पादनों की भी जानकारी देते हैं, ठीक वैसे ही 'मन की बात' जैसे अनमोल कार्यक्रम का भी रोज प्रसारण हो तो हम जैसे अज्ञानी जनों को निश्चित तौर पर लाभ मिलेगा और देश का तेजी से विकास और दसों दिशाओं में विकास, सिर्फ एक रेडियो के माध्यम से ही हो जाएगा। देश के कितने पैसे बचेंगे, सोचें जरा

रोजमर्रा की जिंदगी में हमें कितने ही सवालों से झुंझना पड़ता है, ऐसे में दुनिया के सबसे महान व्यक्तित्व से ही रोज मार्गदर्शन मिलने लगे तो जिंदगी कितनी आसान होगी मुझे तो सोचकर ही गाने का मन कर रहा है, मेरा देश मेरा देश .... बदल चूका है...

कुछ अतिमहत्त्वपूर्ण सवाल जिनमें विस्तृत मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता है. 


१. दांत साफ़ करने का सही समय क्या होना चाहिए, खाना खाने से पहले या बादमें? दाँतों को साफ़ करना जरूरी है भी या नहीं?

२. छात्रों की बड़ी समस्या है रोज नहाया जाए या नहीं? अगर नहाना हो तो कितने दिनों के बाद स्नान करना ठीक है इसका निर्णय कैसे हो?

३. स्वच्छता के लिए झाड़ू हाथ में पकड़ने की सबसे अच्छी पद्धति क्या होनी चाहिए? झाड़ू कितनी देर तक लगानी चाहिए ताकि पूरी जमीन साफ़ हो जाए? जमीन साफ़ हुई या नहीं ये पता करने का आसान तरीका क्या है?

४. हमारी बहनों को इस समस्या का रोज सामना करना पड़ता हैखाना बनाते बनाते अगर नमक ज्यादा पड जाए तो क्या करना चाहिए? किस तरह से परिवार खाना चुपचाप खा भी ले और उन्हें समझ में भी नहीं आये कि क्या खाया इसके लिए कौनसी रणनीति होनी चाहिए?

५. ये समस्या हर व्यक्ति की है जुकाम हो तो छींकने की सही विधि क्या होनी चाहिए? नाकपर रुमाल रखकर या....

६. मच्छर मारने का सबसे बेहतरीन तरीका क्या है? जिससे मच्छर भी मर जाए और समय भी कट जाए। मच्छरों की बढती संख्या को देखते हुए इस विषय पर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से प्रतिस्पर्धा का भी आयोजन किया जाना चाहिए

७. पढाई में जरूरत से ज्यादा मन लग रहा हो तो उसका इलाज क्या करना चाहिए? बच्चे को पढाई से दूर कैसे रखे, ताकि वो स्कॉलर ना बने?

८. लोगों के ज्यादा पढ़ने से बहुत सरदर्द बढ़ने लगा है, बुद्धिजीवी लोगों के लिए, बहुत ज्यादा पढ़ने वालों के लिए कड़े कानून किये जाए ताकि किसीकी पढ़ने की हिम्मत ही ना हो। पढने की जिद करनेवालों पर कर, उपकर, और उप उप कर भी लगा देने चाहिए

९. परीक्षा में फेल होने पर माता पिता को कौनसे जुमले सुनाने चाहिए कि उनका विश्वास हो जाए अपयश ही यश है। टॉपर तो कोई एकही बन सकता है, पर फेल होनेवालों का हिस्सा बनकर आत्मविश्वास बहुत बढ़ता है, ये माता-पिता को कैसे समझाया जाए?

१०. भारत ने डिप्लोमसी के बल पर, बातों ही बातों में, पाकिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान, चीन, अमरीका, जापान, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल इन सबको अपनी मुट्ठीमें कर लिया है। इस अद्भुत कला के कुछ गुर लड़कों को सिखाये जाने चाहिए लडक़ों की बड़ी समस्या है, एक से ज्यादा गर्लफ्रेंड को कैसे संभाले, ताकि एक साथ सभी गर्लफ्रेंड खुश भी रहे और उसी वक्त एक दुसरे के बारे में उन्हें पता भी ना चले।

११. ट्रोलिंग में अक्सर गालियां कम पड जाती है, क्योंकि देशद्रोहियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसलिए अभद्र भाषा का ज्ञान कैसे बढ़ाया जाए? ज्यादा से ज्यादा मवालियों को अपने अभद्र भाषा विकास मिशनसे कैसे जोड़ा जाए, ताकि ऐसे युवाओं की ऊर्जा देश के विकास में चैनलाइज हो? अभद्रतम शब्दों का एक शब्दकोष बनाकर उसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाना चाहिए

भारत के विकास के लिए कट्टर देशभक्तों के कुछ आवश्यक सुझाव:


१. महिलाएं आजकल बहुत बोलने लगी हैं, जिसके कारण पुरुषों पर अन्याय और अत्याचार बहुत बढ़ रहे हैं। महिलाओं की आवाज किस तरह से बंद की जाए ताकि पुरुषों के पुराने अच्छे दिन वापस आएंगे? घरकी बहु बेटियों की आवाज बंद भी हो जाए और कहीं कुछ शोर भी ना हो इसका तरीका क्या हो? महिलाओं के बढ़ते अत्याचार जैसे पढ़ना, लिखना, नौकरियां करना, आझाद जीना इनको रोकने के लिये और पुरुषों के उत्थान के लिये नई सरकारी योजना आधिकारिक तौर पर शुरू होनी चाहिए, जिससे महिलाओं के मनमें दहशत निर्माण हो और वे बोलने की हिम्मत ही ना करें। सरकारी सहयोग से ही ये आंदोलन आसान हो सकता है और देश को भी आधुनिक महिलाओं से बचाया जा सकता है।

२. महिलाओं के मासिक धर्म में उन्हें परीक्षा केंद्र में, स्कूल-कालेजों में प्रवेश पर प्रतिबन्ध होना चाहिए और धीरे धीरे मासिक धर्म की आयु की महिलाओं को शिक्षा और नौकरी से ही प्रतिबंधित करना चाहिए, इससे देश की बहुत प्रगति होगी और औरतों के अत्याचार से आज दबे हुए पुरुषवर्ग को मुक्ति भी मिलेगी। खाली बैठी औरतों से देश को क्या लाभ? उन्हें प्रजोत्पादन के (ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने के) काम में लगाना चाहिए, ताक़ि देशभक्तों की संख्या बढे।

३. पत्रकारिता के क्षेत्र को देश से खारिज ही करना चाहिए। एक सरकारी मुखपत्र काफी है। वैसे भी कौन पढता, लिखता है। सरकार के काम की जानकारी देने के लिए ज्यादा से ज्यादा गाने, वीडियो, फिल्में बनाई जाए। हर सरकारी योजना पर कमसे कम एक फिल्म  कलाकारों का भी सम्मान हो जायेगा और जिसे सहभागी नहीं होना है उसे सोमालिया भेज देना चाहिए (देशद्रोहियों ने पाकिस्तान तो पहले ही भर दिया है।)

४. अन्तमें डिग्री, ग्रैजुएशन को शिक्षा व्यवस्था से समाप्त ही कर देना चाहिए, ना रहेगा बास, ना बजेगी बांसुरी।


अस्वीकृति: ये व्यंग लेखिका के केवल निजी विचार हैं, जिनसे लेखिका स्वयं सहमत हैं या असहमत, इसपर उनके और उनके मन की आपस में सहमति नहीं हुई

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