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26 अप्रैल 2016

बहस का मुद्दा: अक्ल बड़ी या भैस?

हाल ही में एक बड़े लोकतान्त्रिक देश की अजीब बहस छिड़ गई है।देश लोकतान्त्रिक है इसलिए उस देश के लोगों को बहस करना बहुत पसंद है और हर व्यक्ति को अपना मत भी रखना ही है।

हुआ ये कि इस बहसलैंड में एक दिन दो लोगों में कुछ बहस हुई और एकने दुसरे से कहा, “इतनीसी बात को समझते क्यों नहीं? अक्ल बड़ी या भैस?” बस इतना बोलने की देर थी; इसपर तो बड़ी राष्ट्रव्यापी बहस छिड़ गई।

20 अप्रैल 2016

कविता: आत्मा का स्वरुप


बादलों की तरह मन पर जमा होती हैं विचार तरंगे,
आसमान जैसा आत्मा का स्वरूप फिर भी निर्विकार, शांत, और अलिप्त 

विचारों की लहरें बेचैन करती हृदय को
आत्मा का स्वरूप आत्मानंद से शांत और तृप्त

कर्मों के बंधन व्यापते मन और शरीर को
आत्मा फिर भी अलिप्त चैतन्य का विशाल अमर्याद सागर 

07 अप्रैल 2016

भावस्पंदन: मौन का प्रकाश

आजका आलेख और कविता महायोग आध्यात्मिक साधना और मौन के बारे में है। आज के व्यस्त जीवनपद्धति में मौन को वास्तव में जीवन में लाने के लिए थोड़े अलग सन्दर्भों में देखने की आवश्यकता है।