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12 मार्च 2016

कविता: कैसे करें राष्ट्रभक्ति?

जहाँ निरपराध को गुनहगार ठहराया जा सकता है,
जहाँ देश को लूटकर भागना भी आसान है,
जहाँ मासूमों की आत्महत्या को फैशन समझा जाता है,
जहाँ थोडीसी रिश्वत बड़े बड़े गुनाह साफ़ कर देती है,

जहाँ इंसान भी खरीदे बेचें जाते हैं,
जहाँ रक्षक भी भक्षक बन जाते हैं,
उस व्यवस्था के लिए हमारी राष्ट्रभक्ति बलिदान 
कौन राष्ट्रभक्त और कौन राष्ट्रद्रोही?
किसपर विश्वास करें,
कौन सच्चा कौन झूठा?
कैसे समझे,
कैसे करें राष्ट्रभक्ति?  भ्रमों के इस खेल में
हार गई राष्ट्रभक्ति भ्रष्टाचार के सामने.
भ्रष्टाचारी ही शक्तिशाली
शक्तिशाली राष्ट्र की संपत्ति लूटनेवाले 
और आम लोग जीने मरनेवाले
बस चुनाव में ही काम आनेवाले
यहाँ बेगुनाहों पर जुल्मों का अंत नहीं
और गुनाहगारों की खिदमद में कोई कसर नहीं

ऐसी व्यवस्था के लिए राष्ट्रभक्ति बलिदान 

हम राष्ट्रभक्ति कैसे करें? देश के एयरबेस पर आतंकी हमला होता है, भारत की सामरिक शक्ति को इतनी बड़ी चुनौती दी जाती है और हम उलझे हैं कुछ घोषणाओं में


भ्रष्टाचार से भारत की, बिना किसी घोषणाओं के हीबर्बादी हो रही है, हम चिंतित क्यों नहीं?

लोकपाल बिल और काले धन के आंदोलन में माहौल ऐसा बनाया गया था कि जादू की छड़ी घुमाते ही सारे भ्रष्टाचारियों को कड़ी सजा मिलेगी; काला धन वापस आएगा तो महंगाई कम होगी, और अब हम टैक्स ही टैक्स दिए जा रहे हैं। 

अब सब उनकी ही जगह पर आराम से बैठ गए हैं, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आंदोलन हुए थे।

कैसे करें देशभक्ति?

किसपर भरोसा करें? बेगुनाह लोगों के साथ कितनी क्रूरता से बर्ताव किया जाता है, जैसे वे इंसान ना हो, उन्हें भावनाएं ना हो और भष्टाचार की बेशर्मी ऐसी हो चुकी है कि बड़े से बड़े अपराधी को आसानी से आझादी मिल सकती है।

ऐसे में सब कुछ कितना सही चल रहा है, ये दिखाने के लिए हमारी राष्ट्रभक्ति अब प्रतीकात्मक ही रह गई है  


ट्विटर पर: @Chaitanyapuja_