Search

04 जनवरी 2016

शांति से शांति की बात करो

नए वर्ष के आरम्भ में ही पठानकोट एयरबेस पर शनिवार से चल रहा आतंकी हमला और बादमें अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास पर हमले के बाद, आतंकवाद को कैसे रोका जाना चाहिए, यह मुद्दा सामने आने के बजाए शांति वार्ता हर हाल में होनी ही चाहिए, ऐसी प्रतिक्रिया - उम्मीद के - अनुरूप भारत में दिखी। युद्ध आतंकवाद जैसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। शांति के लिए प्रयास होने चाहिए, इस विचार में भी किसी को कोई आपत्ती नहीं हो सकती। पर जो भी प्रयास अब तक हुए और अब जो प्रयास हो रहे हैं, उससे शांति की दिशा में दोनों देश कितने आगे बढे ये इन आतंकी हमलों से स्पष्ट हो रहा है।
आतंकी हमले कूटनैतिक विफलता है या नहीं? क्या लोगों को ये प्रश्न पूछ्नेका अधिकार है? क्या सरकारकी लोगों के प्रति कोई जवाबदेही बनती है?
इसी पीड़ा पर कुछ पंक्तियां..........

कुछ मत बोलो
क्रोध मत करो
आक्रोश मत करो
बस ख़ामोशी से देखो
जो भी हो रहा है
उसकी तारीफों के गीत गाओ


या चुप रहो
पर
शांति से शांति की बात करो

कुछ ना कुछ जरूर होगा
कुछ नहीं हुआ तो
अगला आतंकी हमला होगा
तब तक
कुछ हो या ना हो
बस शांति से शांति की करो

मानवता को मारकर
मानवता के लिए
शांति की बात करो

सही नहीं हुआ तो क्या हुआ
गलत हुआ तो क्या हुआ
किसे क्या करना चाहिए था
जो करना चाहिए था वो क्यों नहीं हुआ
जो रोकना था वही क्यों हुआ
कुछ मत सोचो
शांति से शांति की बात करो
चुप नहीं रह सकते तो
अपनी आँखें बंद कर लो

शांति से आतंक बढ़ते देखो
पर आतंक को आतंक मत कहो
कुछ शस्त्रधारी थे
कुछ दुखियारे थे
तबाही के बिना शांति नहीं मिलती थी
ऐसे कुछ शांति प्रेमी थे

उनकी शांति की भाषा को समझो
उनको आतंकवादी मत कहो
शांति से शांति की बात करो
या खामोशी से तबाही को देखो

और कुछ नहीं हुआ
तो क्या हुआ
आतंक तो और भी बढ़ा
तो क्या हुआ
अपनी विफलता को छुपाकर
बस खुदका गुणगान करो...
अपनी ही विफलता के गीत
अपनों की लाशों पर लिखो
बस
शांति से शांति की बात करो

कौन सुननेवाला है
क्या दुश्मन भी कभी डरनेवाला है
अरे भाई! कब आतंकवाद रुका था
जो अब  रुकनेवाला है
तो अब क्यों रो रहे हो

बस थोड़ी मिठाइयाँ हो जाए
थोड़े जश्न हो जाए
थोड़ी यारी दोस्ती
और शांति की वार्ता हो जाए
कूटनीति, कूटनीति
आखिर है किसलिए!

कुछ बात तो हो रही है
कुछ परिणाम तो मिल रहे हैं
कभी गोलियों से
तो कभी हमलों से
पर
शांति के कुछ प्रयास तो हो रहे हैं

शांति के गीत गुनगुनाते रहो
तबाही का भी जश्न मनाते रहो
भूलो मत
अपने ही गीत गुनगुनाते रहो
विफलता को कहो होशियारी
मूर्खता को कहो समझदारी
बेफिक्र होकर
शांति से शांति की बात करो
अपनी ही तबाही का जश्न मनाओ

युद्ध से कुछ नहीं होगा
प्रतिकार की बात मत करो
आतंकी हमले को दुश्मन का युद्ध मत कहो
बस शांति का जाप करो
शांति से शांति की ही बात करो

और कुछ हो ना हो
शब्दों का जाल बुनकर
अपने अपयश को छुपाओ
अपने अपयश को
राष्ट्रभक्ति की विजय कहो

हम अमन चाहते हैं
अपनी तबाही से दुश्मन को अगर अमन चैन मिलता है
तो यही शांति की वार्ता है
बस यही शांति की चर्चा है
आपस में लड़कर ही सही
दुश्मन को गले लगाकर ही
पर शांति की वार्ता करो
शांति से शांति की ही बात करो

 आतंकवाद पर अन्य कविताएं: