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30 जनवरी 2016

रजोधर्म के कारण महिलाओं के लिए द्वेषभरी क्रूर परम्पराएं

अन्धता से चल रही अनुचित धार्मिक परम्पराएं आज भी बहुत हैं।आज का आलेख मासिक धर्म या रजस्वलाओं के प्रति क्रूर परम्पराओं के बारे में है। अगर आपने कभी ऐसी भयानक परम्पराओं के बारे नहीं सुना हो तो आपको ये सब अजीब लग सकता है। 

27 जनवरी 2016

अपनी जड़ता में उलझी हुई परम्पराओं के लिए घमासान

शनि शिंगणापूर में महिलाओं के प्रवेश पर विवाद हो रहा है। मंदिर में महिलाओं को प्रवेश करने की अनुमति होनी चाहिए या नहीं इसपर लोगों के अलग अलग तर्क और मत हैं। मुझे लगता है कि चर्चा अब इस विषय पर भी होनी चाहिए कि अपनी ही बनाई परम्पराओं के प्रति हम कितने दिन जड़ रहना चाहते हैं?  धार्मिक परम्पराएं अगर भय, संकीर्णता और अतार्किक बंधन निर्माण करें तो क्या उनका औचित्य ही क्या रहता है

19 जनवरी 2016

कविता: अनंतता को गले लगाओ

भक्ति हो या मानवी रिश्ते प्रेम के बिना कुछ भी नहीं आज की कविता प्रेम की अनंतता पर...ऐसा अनंत प्रेम जो पूजा बन जाता है

आसमान की ओर देखो जरा
मेरा प्रेम अनंत है
आसमान की अनंतता को गले लगाओ जरा

16 जनवरी 2016

कविता: अधूरी सांसे

कुछ दिनों पहले 'काफिया पोएट्री' द्वारा सुझाए शब्द 'अधुरा' पर छोटी कविताएँ जिसे मैं पंखुडियां कहती हूँ ट्वीट की थी. अधूरेपन की अलग अलग छटाओं पर कुछ और नई कविताएं...

फिर वही बात दिल से उठती है
अधूरे हैं ख्वाब अभी
अधूरी हैं साँसे
अधूरी है जिंदगी
मिले बिना बिछड़े साथी से 

14 जनवरी 2016

कविता: चुराने हैं कुछ पल बीते कल से

मकरसंक्रांति की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं आज की कविता मेरी दादी को समर्पित है "चुराने हैं कुछ पल बीते कल से" 

07 जनवरी 2016

कविता: अगर आप प्रधानमंत्री नहीं होते

पठानकोट हमले के बाद आतंकियों को मार गिराने की घोषणा हुई, बधाइयों का दौर हुआ और तीन जनवरी को माननीय प्रधानमंत्री एक कार्यक्रम में तुलसी के पौधे को पानी अर्पित करते और योग पर भाषण देते दिखे। पठानकोट ऑपरेशन तब तक समाप्त नहीं हुआ था, इसलिए ये भाषण आलोचना का विषय हुआ। इससे पठानकोट ऑपरेशन की वास्तविक स्थिती की जानकारी सरकार के पास थी या नहीं ऐसा प्रश्न उठता है। इस घटना ने सुरक्षा संस्थाएं और सरकार के बीच समन्वय का अभाव स्पष्ट रूपसे दिखा दिया।

04 जनवरी 2016

शांति से शांति की बात करो

नए वर्ष के आरम्भ में ही पठानकोट एयरबेस पर शनिवार से चल रहा आतंकी हमला और बादमें अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास पर हमले के बाद, आतंकवाद को कैसे रोका जाना चाहिए, यह मुद्दा सामने आने के बजाए शांति वार्ता हर हाल में होनी ही चाहिए, ऐसी प्रतिक्रिया - उम्मीद के - अनुरूप भारत में दिखी। युद्ध आतंकवाद जैसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। शांति के लिए प्रयास होने चाहिए, इस विचार में भी किसी को कोई आपत्ती नहीं हो सकती। पर जो भी प्रयास अब तक हुए और अब जो प्रयास हो रहे हैं, उससे शांति की दिशा में दोनों देश कितने आगे बढे ये इन आतंकी हमलों से स्पष्ट हो रहा है।