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27 अक्तूबर 2015

महान आदर्शों के प्रेरक कवी – आदिकवी महर्षि वाल्मीकि

आज आदिकवी महर्षि वाल्मीकि जयन्ती है


कूजन्तं  रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम्
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम्

अर्थात कवितारुपी शाखा पर आरूढ़ होकर मधुर मधुर "राम राम" नाम का कूजन करनेवाले  वाल्मीकि रूप कोकिल को हम प्रणाम करते हैं

कहते हैं कि महर्षि वाल्मीकि ने महाकाव्य रामायण  की रचना  रामायण के होने से पहले ही की थी वाल्मीकि रामायण की रचना रामायण का यथार्थ वर्णन  है, ऐसा माना जाता है बाद में लिखे गए रामायणों को भक्ति, अध्यात्म, कथा के अन्य पहलू विविध भाषा की दृष्टिसे अलग अलग माना जाता  है लेकिन वाल्मीकि रामायण की कथा जैसे हुई वैसे ही लिखी है, ऐसा वाल्मीकि रामायण का  माहात्म्य माना जाता है 

रामायण की रचना रामायण के होने से पहले  ही हुई या बाद में, रामायण केवल एक काव्य है या इसमें लिखी हुई बाते सत्य है, इन  प्रश्नों अलग करके हम काव्य और कथा की दृष्टीसे ही रामायण को  देखे तो  भी इसकी महानता कालातीत है यह बात निर्विवाद सत्य है

महर्षि वाल्मीकि ने एक बार  क्रौंच के प्रेमी युगुल में से एक का व्याध द्वारा वध होते हुए देखा एक दुसरे से प्रेम करनेवाले जोड़े को अलग करने से अधिक बड़ा पाप क्या हो सकता है वाल्मीकि को अत्यंत पीड़ा हुई, और वही वेदना  एक छन्दोबद्ध श्लोक के रूप में उनके मुख से निकली वे सोचने लगे, यह कौनसी रचना हुई?

उनके श्लोक पर वे और उनके शिष्य विचार करने लगे क्योंकी छंदोबद्ध रचना पहली बार ही हुई थी वेद भी ऐसे नहीं थे

उसके बाद वाल्मीकि ने रामायण की रचना की


रामायण और रामनाम का अमृत:


रामायण में प्रेम के अलग अलग रूप हैं। क्रौंच के प्रेमी जोड़े के बिछड़ने के दर्द से  आरम्भ हुआ और उसीसे आगे प्रेम और रिश्तों पर विश्व  का महानतम काव्य रामायण बना

रामायण और इस कथा का हर चरित्र  इतना मन पर असर छोड़ता है कि एक बार रामायण पढने के बाद जीवन में परिवर्तन आए बिना रह नहीं सकता

मेरे लिए तो राम सबसे आदर्श व्यक्ति रहे हैं, जब भी उनके बारे में पढ़ती हूँ, मैं सोचती हूँ, कैसी रही होंगी उनके मुस्कान 

राम का नाम लेते ही मनमें शांती का उदय होता है ऐसा लगता है, मन की गहराइयों में यह शांति  युगोंयुगोंसे बसी हुई थी, पर उसे कभी महसूस ही नहीं किया  राम का नाम लेते ही, राम का नाम सुनते ही वह शांती प्रकट हो जाती है

राम का नाम लेते ही लगता है, अमृत कैसे होगा इसका अर्थ ही राम नाम है


रामका असामान्य सामान्यत्व:


राम को वाल्मीकि रामायण में भगवान के रूप में ना बताकर, दशरथ का पुत्र राम, मनुष्य के रूप में ही लिखा गया है राम हम सबके बीच हमारे ही बनकर रह गए वे राजकुमार थे पर जिस जिसने उनसे प्रेम किया उन्होंने भी उनपर अपने प्रेम की वर्षा की 
उनको भगवान माने या मनुष्य? मैं उनको दोस्त के रूप में देखती हूँ कभी किसी भी कारण से साथ न छोड़नेवाला दोस्त मन की अस्वस्थता, चिंता, जीवन की अनिश्चितता, मन के द्वंद्व इन सबमें राम साथ रहते हैं नाम लेते ही  उनके साथ होने की अनुभूती मन होती हैं वे सांवले दिखते हैं ऐसा पढ़ा है, लेकिन एक दोस्त के साथ की अनुभूती उसके दिखने से ज्यादा गहरी है 

रामरक्षा में श्लोक है, 


माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः 
स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः 
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो 
दयालुर्नान्यं जाने नैव न जाने

मेरे सखा और मेरे सर्वस्व राम हैं, इनके अलावा हम किसी को  नहीं जानते इस पंक्ति ने  मुझे मेरा सबसे करीबी दोस्त बचपन में ही मिला दिया

राम के चरित्र में चमत्कार नहीं हैं राम की महानता हम सब के जैसे सामान्य होने में और हम सबके जैसे ही जीवन का संघर्ष जीने में है पर उन्होंने अपने आचरण  से आदर्श जीवन क्या होता है, आदर्श प्रेम क्या होता है, परिवार, दोस्ती, जीवनसाथी, भाई, समाज, राष्ट्र, मनुष्यता इन सबके प्रति हमारे कर्तव्य क्या होने चाहिए, उन्हें कैसे निभाना चाहिए, ये दिखाया  आदर्शों को जीते जीते उन्हें कैसे मुश्किलें आयी और फिर भी वे अविचल मनसे सत्य और प्रेम पर के पथ पर ही चलते  रहे यह मुझे बहुत ही प्रेरणादाई लगता है


रामायण में सत्यनिष्ठा का आदर्श: 


मुझे जब भी कोई यह कहता है कि आज के ज़माने में सत्यसे यशस्वी नहीं हो सकते, तब मुझे राम के आचरण का ही स्मरण होता है सत्यनिष्ठा से जीवन जीना सबसे मुश्किल  बात है सत्य मन, वाणी, और कर्मों का एक होना है और इसीलिए यह बहुत ही कठिन होता है राम जैसा सत्य जीवन में लाना, इतना आदर्श मेरा व्यक्तित्व तो मुझे नहीं लगता। परन्तु मैंने जबसे रामायण को पढ़ा है, राम का चिंतन मेरे मनमें हुआ है, निश्चय ही मेरे जीवन को उर्ध्वगती मिली है सत्य कितना सूक्ष्म हो सकता है, उसका मन, वचन और कर्म से पालन करना  कितना असंभव सा लगता है, फिर भी सत्य से जीवन कितना आसान होने लगता है, मन किस तरह से हर दिन साफ़ होता जाता है यह सब रामायण को पढने के बाद मेरे जीवन में आये बदलाव हैं सत्य से मनमें एक विचार, बोलने में कुछ अन्य यह दोष दूर होने लगता है, मुझे यह अपने प्रयासों  से नहीं पर, रामायण की प्रेरणा से सहज संभव लगता है 

राम और सीता के प्रेम के बारे में कितना भी पढो, कितनी बार भी पढो, मुझे वह नया ही लगता है  


हनुमानजी की कार्यकुशलता और तत्परता: 


हनुमानजी की विद्वत्ता, निर्णयक्षमता, और कार्यपद्धती मंत्रमुग्ध कर देती है जब किसीको कोई रास्ता नजर नहीं आता, तब भी हनुमानजी का मन कभी अब क्या होगा, ऐसा विचलित नहीं होता उनका मन शांत होता है और वे उचित निर्णय लेकर काम में जुट जाते हैं हनुमानजी कार्यकुशलता और तत्परता के आदर्श हैं सबको साथ रखने में, योग्य दिशा में प्रेरित करनेमें, जहाँ निर्णय गलत जा रहा हो वहां उचित सलाह देने में हनुमानजी के नेतृत्वगुण स्पष्ट रूपसे दिखते हैं 

प्रेम के रंगों की अनुभूती जीवन में लानेवाले रामायण के बारे में और उसे लिखनेवाले महर्षि वाल्मीकि के बारे में जितना लिखा जाए  उतना कम है 

मुझे जिन कवियोंसे काव्य के प्रति, लिखने के प्रति  प्रेरणा मिलती है, उनमें गोस्वामी तुलसीदास और महर्षि वाल्मीकि के मुझे बहुत प्रभावी लगते हैं

महर्षि वाल्मीकि और राम जीवन में आदर्शों को लाने के लिए और काव्य की प्रतिभा हृदय में लाने के लिए मुझपर हमेशा कृपा करे यहीं उनके चरणों में प्रार्थना है


श्रीराम के प्रेम में चैतन्यपूजा में काव्य: