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18 अक्तूबर 2015

प्रार्थना: चरणकमलों में गुरुदेव आपके

आज नवरात्री उत्सव के छठे दिवस निमित्त का स्तोत्र मेरे सद्गुरूदेव परम पूजनीय श्री नारायणकाकामहाराज को समर्पित है गुरुदेव ने शक्तिपात महायोग की दीक्षा से मेरा जीवन कृतार्थ कर दिया आध्यात्मिक जीवन देनेवाले मेरे गुरुदेव गुरुरूप में प्रकट माँ हैं गुरूदेव के देहत्याग के बाद  मैं अपने अज्ञानवश बहुत दुखी रहती थी सद्गुरू अपने शिष्य को कभी 
किसी भी समस्या में अकेला नहीं छोड़ देते, क्योंकी दीक्षा के साथ ही शिष्य के कल्याण का दायित्व वे लेते हैं; वे ले सकते हैं इसीलिए सद्गुरू होते हैं गुरुदेव की कृपा का स्मरण होता है तो मस्तक झुक जाता है, उनको प्रणाम करने के लिए मस्तक झुकते ही अहंकार रहता ही नहीं और सद्गुरुदेव के विराट सर्वव्यापी और सर्वसाक्षी रूप का परिचय होता है, इसलिए मेरी गुरुदेव से यही प्रार्थना है...  
Image: H. H. Shri Narayankaka Dhekane Maharaj


गुरूदेव की प्रतिमा का दर्शन कर या उनका स्मरणमात्र करनेसे ही लगता है, वे तो हमारे साथ ही हैं, यहीं


चरणकमलों में हे गुरुदेव आपके 
शीष सदा मेरा झुका रहे || 

हर रूप में विराजमान आप
अखंड प्रकाशमय ज्योतिरूप आप
मन मस्तिष्क ह्रदय में ज्ञानप्रकाशक आप 

चरणकमलों में हे गुरुदेव आपके 
शीष सदा मेरा झुका रहे || १ ||

मूक रहकर कृपा बरसाते आप
राह से भटक जाऊं कभी तो सँभालते आप
मेरे हर प्रयास में विराजमान आप
काव्य बनकर मेरा अज्ञान दूर करते आप

चरणकमलों में हे गुरुदेव आपके 
शीष सदा मेरा झुका रहे || २ ||

साधना की सदैव रक्षा करते आप
साधना के विघ्नों का निवारण करते आप
साधना का बार बार स्मरण कराते आप
कर्तव्यनिष्ठा की याद दिलाते आप

चरणकमलों में हे गुरुदेव, आपके 
शीष सदा मेरा झुका रहे || ३ ||

ह्रदय में शुद्धसंकल्प जागृत कराते आप
संकल्प पूर्ती के लिए प्रयास करा लेनेवाले आप
संकल्पपूर्ती के विघ्न दूर करनेवाले आप

चरणकमलों में गुरुदेव आपके 
शीष सदा मेरा झुका रहे || ४ ||

धैर्यशक्ति का वरदान देते आप
शिष्य के ध्येय की चिंता करते आप
शिष्य की सदा रक्षा करते आप 

चरणकमलों में गुरुदेव आपके 
शीष सदा मेरा झुका रहे || ५ ||

यह प्रार्थना वर्तमान में गुरुदेव की कृपा की अनुभूती है, केवल स्मृतियाँ नहीं

इस नवरात्री में प्रथम पांच दिनों में माँ को समर्पित स्तोत्र: