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31 अक्तूबर 2015

सामाजिक वैचारिक बंदिस्तता के लक्षण और परिणाम

महिलाओं के प्रति सामाजिक वैचारिक बंदिस्तता के लक्षण और परिणामों की चर्चा पर आजका आलेख

27 अक्तूबर 2015

महान आदर्शों के प्रेरक कवी – आदिकवी महर्षि वाल्मीकि

आज आदिकवी महर्षि वाल्मीकि जयन्ती है


कूजन्तं  रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम्
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम्

अर्थात कवितारुपी शाखा पर आरूढ़ होकर मधुर मधुर "राम राम" नाम का कूजन करनेवाले  वाल्मीकि रूप कोकिल को हम प्रणाम करते हैं

22 अक्तूबर 2015

स्तोत्र: तुम मेरे साथ हो

आज विजयादशमी है नवरात्री का पर्व समाप्त होने जा रहा है इस वर्ष हमारे प्रिय मंदिर अर्थात ब्लॉग पर प्रार्थनाओं के माध्यम से देवी माँ की अलग अलग रूपों में पूजा की शक्ति, नारी, कुण्डलिनी, महायोग, साधना, हमारी कुलस्वामिनी इन सब रूपों में हमने माँ को देखा मेरा प्रयास था या इच्छा थी कि अपने ह्रदय से निकली प्रार्थनाएँ माँ के लिए लिखनी हैगुरुदेव की कृपा से, देवी माँ की कृपा से और आप सबके सहयोग और प्रोत्साहन  के कारण ही मैं यह कर पाई अलग-अलग विषयों पर रोज एक कविता लिखना मेरे लिए अब तक थोडा आसान रहा है लेकिन एक ही विषय के अलग अलग पहलुओं पर और वो भी आध्यात्मिक विषय पर लिखना मेरे जैसे अज्ञानी व्यक्ति के लिए असंभवसा था पर मूकं करोति वाचालं ऐसी कृपा उस माधव की हो तो फिर कुछ असंभव नहीं हो सकता  

रावण का महिमामंडन क्यों?

कल विजयादशमी है| विजयादशमी का त्यौहार धर्म की अधर्म पर विजय के रूप में मनाया जाता है| यह तो हम जानते ही हैं|  विजयादशमी पर रावण दहन होता है| रावण को अधर्म का प्रतीक माना गया है| पर पिछले कुछ वर्षों में रावण का महिमामंडन बढ़ गया है या बढाया गया है| यह महिमामंडन कितना उचित है और धार्मिक विद्वेष के लिए इस मुद्दे का कैसे उपयोग किया जाता है इसीसे जुड़े पहलुओं पर यह आलेख|

20 अक्तूबर 2015

वेदना: क्या हम वास्तव में देवी माँ की पूजा करते हैं?

आज नवरात्रि के आंठवे दिन नारी के रूप में विराजमान भगवती माँ और महिला समस्याओं पर एक वेदना कल स्त्री के रूप में विराजमान भगवती पर अंग्रेजी में कविता Do we really worship Devi Maa? लिखी थी, उसीका यह हिंदी रूपांतरण है देवी माँ की पूजा में हमारी प्रमुखता माँ की मूर्ती रूप में अर्चना, उसके संबंधी विधीविधान और उपवास  आदि पर होती है लेकिन, हमारी भक्ति तभी पूर्ण होगी जब हम महिलाओं पर हो रहे अत्याचार, भ्रूणहत्या और स्त्री-पुरुष समान अधिकारों के लिए निश्चित ध्येय के साथ ठोस काम आरम्भ नहीं करते

यह केवल कविता नहीं ह्रदय की वेदना है


क्या हम वास्तव में देवी माँ की पूजा करते हैं?
किस रूप में?
किस किस रूप में?
माँ, बहन, दोस्त, बेटी, पत्नी, एक स्त्री?
क्या हम उसकी पूजा करते हैं?
क्या हम स्त्रीत्व की पूजा करते हैं?

18 अक्तूबर 2015

प्रार्थना: चरणकमलों में गुरुदेव आपके

आज नवरात्री उत्सव के छठे दिवस निमित्त का स्तोत्र मेरे सद्गुरूदेव परम पूजनीय श्री नारायणकाकामहाराज को समर्पित है गुरुदेव ने शक्तिपात महायोग की दीक्षा से मेरा जीवन कृतार्थ कर दिया आध्यात्मिक जीवन देनेवाले मेरे गुरुदेव गुरुरूप में प्रकट माँ हैं गुरूदेव के देहत्याग के बाद  मैं अपने अज्ञानवश बहुत दुखी रहती थी सद्गुरू अपने शिष्य को कभी 
किसी भी समस्या में अकेला नहीं छोड़ देते, क्योंकी दीक्षा के साथ ही शिष्य के कल्याण का दायित्व वे लेते हैं; वे ले सकते हैं इसीलिए सद्गुरू होते हैं गुरुदेव की कृपा का स्मरण होता है तो मस्तक झुक जाता है, उनको प्रणाम करने के लिए मस्तक झुकते ही अहंकार रहता ही नहीं और सद्गुरुदेव के विराट सर्वव्यापी और सर्वसाक्षी रूप का परिचय होता है, इसलिए मेरी गुरुदेव से यही प्रार्थना है...  
Image: H. H. Shri Narayankaka Dhekane Maharaj


गुरूदेव की प्रतिमा का दर्शन कर या उनका स्मरणमात्र करनेसे ही लगता है, वे तो हमारे साथ ही हैं, यहीं


चरणकमलों में हे गुरुदेव आपके 
शीष सदा मेरा झुका रहे || 

17 अक्तूबर 2015

प्रार्थना: तेरी शरण में हूँ माँ

आज नवरात्री उत्सव का पांचवा दिन है आज की प्रार्थना विशेष रूप से मेरे परिवार की कुलस्वामिनी मनसादेवी या मनुदेवी के लिए मेरे मनमें आई

14 अक्तूबर 2015

प्रार्थना: साधन में दृढ़ निष्ठा देना

नवरात्रि उत्सव चल रहा है जगदम्बा माँ की आराधना में हमारे दिन और रात भक्तिमय हो रहे हैं। आज चैतन्यपूजा में भगवती की प्रार्थना में एक स्तोत्र यह प्रार्थना माँ से साधना में दृढ़ निष्ठा बनी रहे इसलिए विशेषरूप से मेरे मन में आई 

10 अक्तूबर 2015

कविता: हारना चाहती हूँ तुम्हारे लिए

आज कुछ काव्यपुष्पों की या कहूं की भावनाओं की पंखुडियां ट्वीट की थी| उन्हींका विस्तृत हिंदी रूपांतरण ...

शनिवार की शाम,
न कोई काम,
न दिल को आराम 
कुछ खालीसे बहके ख्याल 
अब आगे क्या?

09 अक्तूबर 2015

हाँ, मैं एक कवी हूँ

आज की कविता, काव्य और कवियों को समर्पित है; शब्दों और कलम की शक्ति को समर्पित है

07 अक्तूबर 2015

क्या 'मानवता' मात्र एक शब्द बनकर रह गया है?

दादरी में अफवाह पर हत्या की घटना और उसपर स्वार्थ की घृणित राजनीती पर यह आलेख 

कविता: मृदुमना

कुछ ऐसेही आज लिखने का मन हुआ, 


आपका गुस्सा,
आपकी हताशा,
आपकी नफरत?

02 अक्तूबर 2015

कविता: कठपुतलियाँ या खिलौने?

आज की प्रस्तुति समाज के हर वर्ग के हर व्यक्ति के लिए है| अपने विवेक या अविवेक का आत्मपरीक्षण हर किसी ने करना चाहिए|