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31 अगस्त 2015

कविता: हत्याएँ तो हररोजही होती रहती है...

आजकल हत्याएँ बहुत चर्चामें है| कोई लेखक की हत्या कैसे कर सकता है? कोई माँ अपनी बेटी की हत्या कैसे कर सकती है? पर उन हत्याओं के बारे में मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी है| मुझे तो उन हत्याओं के बारे में बात करनी है जो रोज हमारे सामने होती है| वैचारिक हत्या! आत्मा की हत्या!

26 अगस्त 2015

...यही काव्य में जीना है

काव्य, जीवन के कटु - मधुर अनुभव और इन अनुभवों को साक्षी भाव से देखकर आनेवाली अंत:स्थिरता इनपर आजकी काव्यप्रस्तुति| जिन्दगी के सुख और दुःख, दोनों के, पलों में दिव्य शब्दों ने मुझे शक्ति दी; साथ दिया| इन शब्दों के लिए, इनके प्यार के जितना भी लिखा जाए, कम ही है...  


Image for Hindi Poem: Yahi Kavya Mein Jeena Hai


शब्दों में जीना,

हर रंग में शब्दों के जीना 
यही कविता है...