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28 जुलाई 2015

कविता: अनासक्ति

कभी कभी सोच सोचकर भी एक थकान सी आती है विशेषत: ऐसा तब होता है, जब हम किसी समस्या का समाधान खोज नहीं पाते और ऐसा लगता है कि शायद अब कोई रास्ता नहीं ऐसा कभी हो नहीं सकता कि किसी समस्या का कोई समाधान न हो पर बहुत विचार करने के कारण कभी कभी ऐसा लगता है ऐसी स्थिति में लोग अलग- अलग दृष्टिकोण अपनाते हैं, उन्हींका वर्णन करती और सकारात्मक दृष्टि से समस्या की ओर देखने के लिए प्रेरित करनेवाली कविता ...

मन के आसमान में एक क्षितिज
ऐसा कभी आता है
विचार जहाँ रूक जाते हैं
एक घना अँधेरा छा जाता है
एक तरफ तो जिन्दगी
समस्याओं से भरी
और दूसरी ओर है शांति ही शांति
जीवन के मृत्यु से आनेवाली?
या विचारों के मृत्यु से आनेवाली?
क्या है उस क्षितिज के पार...?
क्या है इस घने अँधेरे के पार...?
या फिर हो सकती है शांति
अनासक्ति की!
शांति....
समस्याओं के कोलाहल में
अथांग बहती शांति...

अनासक्ति

यह कविता मेरे अन्य ब्लॉग पर प्रकाशित अंग्रेजी कविता Horizon का हिंदी रूपांतरण है

आध्यात्मिक और प्रेरणादायी आलेख/कविताएँ:


13 जुलाई 2015

कविता: शांति-स्वर

हर संध्या बहुत सुन्दर होती ही है ऐसा नहीं..लेकिन प्रत्यक्ष निसर्ग सौन्दर्य के बिना भी सौंदर्यानुभव और उदासी में भी शांति का गहरा अनुभव लाता आज का काव्य ....शांति-स्वर 

02 जुलाई 2015

कविता: अनकही भावनाएँ

आज की कविता का विषय है, 'अनकही भावनाएं' बहुत बार ऐसा होता है कि हम वह बात नहीं कह पाते जो हमारे मनमें है और कभी कभी तो जिंदगीभर कह नहीं पाते वह बातें, सुख-दुःख की भावनाएं कहीं न कहीं अन्दर ही दबी रह जाती है इसी विषय पर एक काव्यात्मक कथा..

काश कभी मैं बात कर पाती
अपना दर्द तुमसे बाँट पाती