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28 मई 2015

स्वातंत्र्यवीर सावरकर: क्रांति के महासूर्य

आज क्रांति के महासूर्य स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी की जयन्ती है| पाठशाला में सावरकरजी के ‘माझी जन्मठेप’ (मेरा आजीवन कारावास) का कुछ अंश हमें मराठी विषय में अध्ययन के लिए था| ‘माझी जन्मठेप’ में  अंदमान के काले पानी का विस्तृत वर्णन है| मैनें पहली बार वो अंश पढ़ा तबसे सावरकरजी के नेतृत्व और लेखन ने मुझे बहुत प्रभावित किया| आज मुझे बहुत प्रसन्नता लग रही है कि मैं उन्हीं सावरकरजी के बारे में उन्हींके प्रभाव से उनके कार्य के कुछ पहलुओं पर लिखने की धृष्टता कर रही हूँ|


सावरकर: निरंतर प्रेरणा के स्रोत 


सावरकरजी की क्रांति, उनकी राष्ट्रभक्ति, उनका पराक्रम और उनका हिंदुत्व| एक आग है उनके विचारों में! ऐसा जबरदस्त प्रभाव है की आज भी कमजोर से कमजोर इन्सान का मन-मस्तिष्क आत्मविश्वास और शक्ति से भर दे | सावरकर आज भी उर्जा और प्रेरणा के अखंड स्रोत हैं| ऐसा प्रभाव केवल शाब्दिक पांडित्य से नहीं आता, उसमें त्याग, राष्ट्र के लिए पूरे परिवार की आहुती, अपना पूरा जीवन अपने देश के लिए देने की तपस्या से आज भी बना हुआ है|

सावरकर के विचार राष्ट्रभक्ति, इतिहास और राजनैतिक दृष्टी से प्रेरणादायक हैं ही, परन्तु उनकी प्रेरणा हमारे सामान्य से जीवन को भी ऊँचे आदर्शों और लक्ष्यों के पथ पर दृढ़ता से चलने में अद्वितीय है| मैं जब भी अपने आपको हारा हुआ महसूस करती हूँ, जब मुझे किसी संकट से आगे कोई रास्ता नजर नहीं आता और विचार थककर चुप हो जाते हैं तब मुझे ‘माझी जन्मठेप’ से नई ऊर्जा और शक्ति मिलती है| अंडमान में कैदियों पर होनेवाले अत्याचार और उनसे सावरकर की लड़ाई, इससे कठिन जीवन किसका हो सकता है! फिर भी वे लड़ते रहें और सरकार को झुकना पड़ा|  

सावरकर की तर्कनिष्ठा:  


उनके हिंदुत्व के विचारों से या तर्कनिष्ठ विचारों से या धर्म के प्रति 
तर्काधारित विज्ञाननिष्ठ विचारोंसे चाहे कोई सहमत हो या असहमत पर  सावरकर जी का सम्मान किए बिना कोई भी ‘सच्चा ज्ञाननिष्ठ’ व्यक्ति रह नहीं सकता |

सावरकर ने छुआछुत को समाप्त किया| मंदिर में सबके लिए पतित पावन मंदिर की स्थापना की| उन्होंने हिन्दुओं में आधुनिक काल में निर्माण हुई अंधश्रद्धाओं पर, कुरीतियों पर प्रहार किये और उन्हें बदला| धर्म को बुद्धि, तर्क और आधुनिक विज्ञान की दृष्टिसे देखा| क्या ऐसे नेता को कोई बुद्धिजीवी व्यक्ति 'कट्टरवादी' कह सकता है?
छुआछुत के विषय पर सावरकर ने बिलकुल स्पष्ट शब्दों में तत्कालीन शंकराचार्यजी की भी आलोचना की थी|

सावरकरजी ने अस्पृश्यता पर समाजसुधार के लिए 'जन्मजात अस्पृश्यतेचा  मृत्युलेख' (जन्मसे आई अस्पृश्यता का मृत्युलेख) और जात्युछेदक निबंध लिखे|

विचारधारा में प्रामाणिकता:


सावरकर से द्वेष का सबसे बड़ा कारण है उनकी स्पष्ट हिंदुत्वनिष्ठा| हिंदुत्व पुस्तक से हिंदुत्व का अर्थ  उन्होंने लिखा|

लेकिन सावरकर धर्म के नाम पर द्वेष फैलानेवाले नहीं थे| सावरकर का हिंदुत्व अपने स्वार्थ के लिए नहीं था| उनकी राजनीती में रंग बदलनेवाली अवसरवादिता नहीं थी; दोगलापन नहीं था|

इसके दो उदाहरण मुझे यहाँ देने आवश्यक लगते हैं|


सावरकरजी ने '१८५७ के स्वातंत्र्यसमर' में एक मुस्लिम राष्ट्रभक्त राजा
की 
देशभक्ति की कहानी अपने शक्तिशाली शब्दों में लिखी है| उस मुस्लिम राजाने  किस तरह से ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध संघर्ष किया, लेकिन अन्य गद्दार राजा  के कारण कैसे वे पकडे गए यह  बहुत ही ह्रदयस्पर्शी कथा है| उन्होंने इतिहास को सच्चाई से लोगों के सामने रखा|

अंडमान में भी सावरकरने कैदियों के प्रति अन्याय दूर किया था| सारे कैदियों को उसका लाभ मिला, उसमें हिन्दू मुसलमान भेद नहीं था|
सावरकर के नेतृत्व में इतनी शक्ति का कारण उनके विचार और कृति में इमानदारी थी| उनके वक्तव्यों और हेतु में स्पष्टता और दृढ़ता थी| और इसलिए अहिंदुओं के साथ भी धोके की और अन्याय की सम्भावना नहीं थी|  

महान लेखक और कवी सावरकर:



सावरकर के शब्दों में अद्भुत प्रभाव था| व्यक्तित्व प्रभावी होता है, तो उस व्यक्ति की हर बात में वो शक्ति और वो प्रभाव झलकता है, वो खुद दिखाना न चाहे फिर भी| सावरकर के शब्द फिर वह गद्य हो या पद्य, विलक्षण शक्ति से भरे हुए हैं| चौदह वर्ष की आयु में उन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए स्वातंत्र्य देवी पर एक काव्य लिखा, जयोस्तु ते श्रीमहन्मंगले शिवास्पदे शुभदे”|  आज भी अगर इस काव्य के बोल आपको कहीं सुनाई दे तो रोम रोम राष्ट्रभक्ति से पुलकित हो उठता है| सावरकर जैसा महान कवी आधुनिक भारत में शायद ही कोई हुआ हो| अंदमान में काले पानी जैसे महाभयानक नरक यातनाओं से गुजरते गुजरते कितने ही कैदी दम तोड़ देते थे, कितने ही आत्महत्या कर लेते थे| उसी काले पानी में कोलू में बैल की जगह बंध कर रोज बेहोश हो जाने की हद तक सावरकर तेल निकालते थे और काव्यरचना करते थे| कारागृह की दीवार पर रोज लिखते थे, जो रचना होती थी उसे रोज याद करते थे, और फिर उसी जगह पर दुसरे दिन अगला अंश लिखते थे| जेल में कदम रखते ही निराश होने की बजाय उन्होंने रोज कितनी काव्य रचना करनी है यह तय कर लिया था| ऐसी प्रतिभा, ऐसी स्मृति मैंने तो किसी और नेता में नहीं देखी| काव्य भी राष्ट्र के लिए|


सावरकर के शब्द बहुत ही सुंदर मंत्रमुग्ध करनेवाले संस्कृत प्रचुर शब्द हैं| जिसे ज्ञान की तृष्णा जीने नहीं देती उनके लिए सावरकर को पढना स्वर्ग में विचरण करना है| 

सावरकर ने मराठी भाषा में अंग्रेजी, अरबी शब्दों के लिए संस्कृत प्रचुर मराठी शब्द दिए| 

सावरकर: भविष्य के लिए प्रेरणा


सावरकरजी के जीवन और कार्य के एक एक पहलू पर आज के दौर में, नए 
सिरेसे, पूर्वग्रहदूषित दृष्टी रखे बिना सोचने की आवश्यकता है| हमारी पीढ़ी 
को इतिहास की पड़ताल करने के लिए, सत्य क्या है यह खोजने के लिए आज संसाधन उपलब्ध हैं| अगर आज हम सावरकर जैसे महान नेता के बारे केवल सुनी सुनाई विषाक्त बातों के भरोसे उनकी आलोचना करे तो 
हम पढ़ लिख कर भी अनपढ़ ही रहेंगे|  


सावरकरजी कार्य पर सावरकर.ओर्ग पर आलेख और सावरकर के साहित्य का संग्रह अंग्रेजी और मराठी में है| यह सब पूरी तरह से नि:शुल्क है| सावरकर की प्रेरणा का लाभ आप सब अवश्य ले|


सावरकरजी को शतशः नमन|  

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