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02 मार्च 2015

कविता: तुम्हारे बिना

आज का विषय, 'तुम्हारे बिना'! मैंने पहले मराठी और अंग्रेजी में इस पर जो रचनाएँ लिखी थीं, उन्हींका यह हिंदी रूपांतरण, 


एक क्षण भी 
नहीं जी सकती 
तुम्हारे बिना!

ये साँसे 
नहीं चलती
तुम्हे याद किए बिना!

घड़ी से भी तेज 
दौड़ रही है 
यह जिन्दगी 
बस मैं रुक गई हूँ!
अभी भी वहीँ
तुम्हारे बिना! 

जिन्दगी बन गई है 
बहती जख्म 
तुम्हारे बिना!

दु:खी जरूर हूँ
भूली नहीं तुम्हे
तुम्हारी दोस्ती ही तो है 
मुस्कान मेरी
आज भलेही 
तुम्हारे बिना!   

ये पागल आँसू
रुकते क्यों नहीं?
आज भी बुला रहें हैं
तुम्हेही!

तुम बहुत क्रूर हो
मुझसे या अपने आपसे
जी रही हूँ
जिन्दगी की जख्म 
तुम्हारे बिना! 

तुम्हारी तीव्र वेदना
नहीं बताओगे तुम 
पढ़ती हूँ लेकिन 
तुम्हारे बिना! 

यह प्यारे शब्द
क्यों नहीं बनते 
आज कविता 
कमी क्या रह गई आज?
मेरा दिल या तुम?
ये धडकनें रुक गई 
तुम्हारे बिना!

इसी विषयपर, 
अंग्रेजी रचना यहाँ पढ़ें: Without You
मराठी रचना यहाँ पढ़ें: तुझ्याशिवाय  

2 टिप्‍पणियां:

  1. जिन्दगी भी तो जिंदगी नहीं होती तुम्हारे बिना ...
    प्रेम के गहरे जज्बात ...

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    उत्तर
    1. दिगंबर नासवा जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिये धन्यवाद! :-) देरी से उत्तर के लिये क्षमस्व!

      हटाएं

चैतन्यपूजा मे आपके सुंदर और पवित्र शब्दपुष्प.........!