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28 मार्च 2015

कविता: बात बात में बात इतनी जज्बाती क्यों हो गई?


आज की कविता कुछ अलग नए अंदाज में मुझे उम्मीद है, आपको जरूर अच्छी लगेगी

22 मार्च 2015

कविता: क्यों जिन्दगी बन गई है इतनी मुश्किल?

प्रेमी से बिछड़ने के दर्द पर कुछ छोटी छोटी कलियाँ, पंखुड़ियाँ   

21 मार्च 2015

20 मार्च 2015

विचारों के बादलों पार आत्मा का निर्विकार स्वरुप

आज बहुत खुबसुरत नजारा देखा, प्रेरणा हमारे आसपास होती है और निसर्ग का सान्निध्य बहुत कुछ सिखाता है | अध्यात्म का जो गहन ज्ञान पुस्तक पढ़कर समझ में नहीं आता, वह निसर्ग के सुन्दर बदलतें रूपोंसे सहजही समझमें आता है | आज का विचारमंथन, विचारों पर ही है | मन में उमड़ती लाखों विचारों की लहरें और उनसे पूरी तरह से अलिप्त आत्मा ! आत्मा का स्वरुप जो मुझे कुदरत ने समझाया, वही आज आपके साथ बाँट रही हूँ!

04 मार्च 2015

सक्षम नेतृत्व की परख कैसे होती है?

बेन्यामिन नेतान्याहू का अमरीकी संसद में भाषण देखने के बाद हमारे देश में हम किसी नेता के नेतृत्व को प्रभावी क्यों माने, उनमें ऐसी क्या बात है जो उन्हें खास बनाती है, इस पर आम तौर पर मीडिया में और सोशल मिडिया में, लोगों में जिस तरह की चर्चा होती है, वह याद आया| हमारी नेतृत्व कल्पनाओं पर कुछ विचार और कुछ प्रश्न!

02 मार्च 2015

कविता: तुम्हारे बिना

आज का विषय, 'तुम्हारे बिना'! मैंने पहले मराठी और अंग्रेजी में इस पर जो रचनाएँ लिखी थीं, उन्हींका यह हिंदी रूपांतरण, 

01 मार्च 2015

कविता: तुम्हीसे

आज एक बहुत ही छोटी सी कहानी (very short story - vss), 
इतनी छोटी की पांच ही शब्दों में, (Five words),
ट्विटर से जिसकी लत सी लग जाती है, ऐसी माइक्रो - सूक्ष्म कविता,
प्यार की प्यारी सी कविता,