Search

26 दिसंबर 2015

कविता: इन्सान खिलौनों की तरह चावी से नहीं चलते

मानवी मनका अहंकार ऐसा होता है कि जब रिश्ते कमजोर होने लगते हैं तो उसका कारण ढूंढने के बजाए वह इन्सान को एक के बाद एक और गलतियां करने पर मजबूर करता है 

भावनाएं बाजारों में
थोक में नहीं मिलती
रिश्ते बहुत खास होते हैं

24 दिसंबर 2015

कविता: शब्दों से खिलती माला

एक कविता लिखने के बाद उसीसे प्रेरीत होकर दूसरी कविता का जन्म होता है  इस भाव पर कुछ दिनों पहले मराठी कविता लिखी थी, "शब्दांत शब्द गुंफत जाती" वही कविता आज हिंदी में


शब्दों से शब्द खिलती माला बनते हैं
सपनों से नए सपने जन्म लेते हैं

16 दिसंबर 2015

कविता तुम्हारे हृदयमें रहनेवाली

कल नई कविता क्या लिखूं मैं सोच रही थी और कुछ पल के लिए लगा कि आज तो कुछ नहीं लिखा जा रहा. तभी मेरी कविता ने मुझसे बात की और मुझे प्रेरित किया लिखने के लिए...

13 दिसंबर 2015

कविता: मन से ही पुकार लो एक बार

भगवान की भक्ति में, भगवान के लिए की जानेवाली छोटी से छोटी बात भी वे बहुत प्रसन्नता से स्वीकार करते हैं और अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं. भगवान के इस कृपालु स्वभाव पर कविता...'मन से ही पुकार लो एक बार'

07 दिसंबर 2015

क्या असहिष्णुता पर बहस विपरीत दिशा में खीचीं गई?

चेन्नई में बारिश और बाढ़ से हजारों लोग जब फंसे हुए थे तब संसद में असहिष्णुता पर चर्चा चल रही थी चेन्नई में बारिश की स्थिति एक दिन में ही तीव्र नहीं हुई थी, पर फिर भी असहिष्णुता पर चर्चा करना सांसदों को (और हम सबको भी) ज्यादा आवश्यक लगा चर्चा से कुछ राष्ट्रहित में समाधान निकले तो उस चर्चा का उपयोग है संसद की चर्चा को देखते हुए लगा कि ये चर्चा अलग दिशा में आगे बढ़ रही है इसी विषय पर आज का आलेख 

04 दिसंबर 2015

महंगाई के राजनैतिक फायदे: तुअर दाल का साइड बिजिनेस

अरहर या तुअर की दाल के बढ़ते दामों के बीच महाराष्ट्र में ९९ रूपए प्रति किलोग्राम दाल भाजप के स्टाल से मिल रही थी दिवाली के तोहफे के रूप में ये दाल या तोहफा 'खरीदने' का मौका 'जनता' को मिला। सत्ताधारी पक्ष के इस व्यावसायिक निर्णय पर आज के आलेख में कुछ प्रश्न

30 नवंबर 2015

स्तोत्र: प्राणप्रवाहिणी चैतन्यपूजा


आज की प्रस्तुति चैतन्यपूजा के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर एक कविता। २५ नवम्बर को ब्लॉग के रूप में चैतन्यपूजा का सफ़र पांच वर्ष के पड़ाव पर पहुंचा।

इस वर्ष हमने गणेश उत्सव में गणपति की प्रार्थना और नवरात्री उत्सव में विभिन्न रूपों में प्रकट देवी माँ की उपासनारूप प्रार्थनाओं से मनाया।

इन पांच वर्षों में चैतन्यपूजा के रूप में लिखने मुझे जो मन:शान्ति की अनुभूति होती है वह मेरे लिए लिखने का सबसे बड़ा आनंद लगता है।आज की कविता, मेरे लिए चैतन्यपूजा क्या है और इसने मेरे जीवन को किस किस तरह से समृद्ध किया है।

चैतन्यपूजा का अर्थ मेरे लिए केवल लेखन नहीं, ये तो
महायोग की अविरत अखंडित प्राणसाधना है ...

29 नवंबर 2015

वेदना: अच्छी लडकी 'बनाने' के लिए बुरे बंधन

बीबीसी हिंदी रेडियो पर ‘अच्छी लडकी’ की परिभाषा क्या होनी चाहिए, इस विषय पर शनिवार को चर्चा थी मैंने ट्विटर पर अपना मत लिखा और उसीके साथ कुछ उत्स्फूर्त पंक्तियाँ मनमें आई, लेकिन ट्विटर पर लिखना संभव नहीं था आजकी प्रस्तुति एक लडकी की पीड़ा पर

21 नवंबर 2015

बिहार के चुनाव परिणामों से बदले राजनैतिक समीकरण

कल बिहार के मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह के साथ नए राजनैतिक समीकरण बनते दिखे बिहार में लालूप्रसाद यादव, नितीश कुमार और कांग्रेस गठबंधन की जीत और भाजप की हार इस स्थिती, बदलते राजनैतिक समीकरण पर एक सामान्य व्यक्ति के जीवन की दृष्टी से आज का आलेख 

16 नवंबर 2015

वेदना: हार या जीत...मासूमों की जान जाती है

दुनियाभर में अलग अलग कारणों से चल रहे हिंसाचार से रक्तपात, आँसू, आक्रोश हमें रोज देखने को मिलता है. ये सब रोका नहीं जा सकता ऐसा समझकर जिन्दगी और दुनिया के प्रवाह के साथ ही बहते रहना होता है. इसी दुःख पर कुछ पंक्तियाँ...

युद्ध नीतियां चलती रहती हैं
मासूमों की जान जाती है
कभी खुली तो कभी छुपी
कभी आर्थिक तो कभी धार्मिक
युद्धनीतियां चलती रहती हैं
मासूमों की जान जाती है

15 नवंबर 2015

हमें रंगारंग कार्यक्रम इतने अच्छे क्यों लगते है?


मोदीजी के स्वागत में ब्रिटेन वेम्बले स्टेडियम में आयोजित इवेंट का रंगारंग कार्यक्रम थोड़ी देर के लिए देखा। मैंने इस कार्यक्रम का वीडियो धुले से देखाधुले,  वही जहाँ कभी कभी एक ब्लॉग पोस्ट टाइप करते करते ४-५ बार बिजली जाती है। जहाँ कभी कभी एक १०० अक्षरों का छोटासा ट्वीट भेजने में ५ मिनट लग जाते हैं।

भारतीय मीडिया का उत्साहजनता में जोशब्रिटेन के भारतीय मूल के लोगों में उत्साह ये भी इस कार्यक्रम के दौरान देखा। मेरे मन में एक प्रश्न आयाहमें रंगारंग कार्यक्रम इतने अच्छे क्यों लगते हैं

11 नवंबर 2015

दीपावली का प्रकाश

चैतन्यपूजा के सभी दोस्तों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीपावली का त्यौहार आप सबके जीवन में प्रेम, ज्ञान और समृद्धि का प्रकाश लाएं सौहार्द का उजियारा दिवाली का साथ फैले

10 नवंबर 2015

प्रार्थना: जपना है बस तुम्हाराही नाम मेरे राम

आज गोंदवले के भगवान श्रीराम के लिए एक प्रार्थना गोंदवले में दिवाली में बड़ा उत्सव होता है कुछ वर्ष पहले गोंदवले में दो दिन रहने का सौभाग्य मुझे मिला था तबकी कुछ यादें भी आजकी प्रस्तुति में ...

09 नवंबर 2015

भाजप की दिशाहीन अव्यवस्थात्मक नीतियां

बिहार में भाजप की हार पर चर्चा हो रही है| भाजप समर्थकों का अभी भी मानना है कि इस हार के परिणाम अच्छे ही होंगे| भाजप विरोधकों में दिल्ली के चुनावों के बाद और अब भी तुरंत अति उत्साह का वातावरण नजर देखने में आ रहा है| 

इस चुनाव का निर्णय एक निश्चित स्थाई बदलाव लाएगा या नहीं ये तो आनेवाला समय ही बताएगा| किसी भी निर्णय पर अभी पहुंचना जल्दबाजी होगी| लेकिन ये बात तो लगती है कि भाजप के 'तरीकों' को जनता ने नकारा है|

इन तरीकों की चर्चा आजके आलेख में| 

02 नवंबर 2015

कविता: बेवजह यूँही

आज कुछ पंक्तियाँ दोस्ती पर...


बेवजह यूँही मुस्कान खिल उठे  लबों पर 
जिसकी याद आने से 
बेवजह यूँही सारे गम मिट जाए 
जिसकी याद आने से 
बेवजह यूँही आँखें देखने लगे खुबूसूरती अदृश्य हवा में 
जिसकी  याद आने से
...वही दोस्त होता है सच्चा अपने दिल का  


क्या आपने भी इसे अनुभव किया है?

दोस्ती पर कुछ और कविताएँ:

01 नवंबर 2015

कविता: उलझन

कभी कभी उलझन भी कविता बन जाती है

न तुमको समझ पाती हूँ मैं 
न मेरे इस बेचैन दिल को

31 अक्तूबर 2015

सामाजिक वैचारिक बंदिस्तता के लक्षण और परिणाम

महिलाओं के प्रति सामाजिक वैचारिक बंदिस्तता के लक्षण और परिणामों की चर्चा पर आजका आलेख

27 अक्तूबर 2015

महान आदर्शों के प्रेरक कवी – आदिकवी महर्षि वाल्मीकि

आज आदिकवी महर्षि वाल्मीकि जयन्ती है


कूजन्तं  रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम्
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम्

अर्थात कवितारुपी शाखा पर आरूढ़ होकर मधुर मधुर "राम राम" नाम का कूजन करनेवाले  वाल्मीकि रूप कोकिल को हम प्रणाम करते हैं

22 अक्तूबर 2015

स्तोत्र: तुम मेरे साथ हो

आज विजयादशमी है नवरात्री का पर्व समाप्त होने जा रहा है इस वर्ष हमारे प्रिय मंदिर अर्थात ब्लॉग पर प्रार्थनाओं के माध्यम से देवी माँ की अलग अलग रूपों में पूजा की शक्ति, नारी, कुण्डलिनी, महायोग, साधना, हमारी कुलस्वामिनी इन सब रूपों में हमने माँ को देखा मेरा प्रयास था या इच्छा थी कि अपने ह्रदय से निकली प्रार्थनाएँ माँ के लिए लिखनी हैगुरुदेव की कृपा से, देवी माँ की कृपा से और आप सबके सहयोग और प्रोत्साहन  के कारण ही मैं यह कर पाई अलग-अलग विषयों पर रोज एक कविता लिखना मेरे लिए अब तक थोडा आसान रहा है लेकिन एक ही विषय के अलग अलग पहलुओं पर और वो भी आध्यात्मिक विषय पर लिखना मेरे जैसे अज्ञानी व्यक्ति के लिए असंभवसा था पर मूकं करोति वाचालं ऐसी कृपा उस माधव की हो तो फिर कुछ असंभव नहीं हो सकता  

रावण का महिमामंडन क्यों?

कल विजयादशमी है| विजयादशमी का त्यौहार धर्म की अधर्म पर विजय के रूप में मनाया जाता है| यह तो हम जानते ही हैं|  विजयादशमी पर रावण दहन होता है| रावण को अधर्म का प्रतीक माना गया है| पर पिछले कुछ वर्षों में रावण का महिमामंडन बढ़ गया है या बढाया गया है| यह महिमामंडन कितना उचित है और धार्मिक विद्वेष के लिए इस मुद्दे का कैसे उपयोग किया जाता है इसीसे जुड़े पहलुओं पर यह आलेख|

20 अक्तूबर 2015

वेदना: क्या हम वास्तव में देवी माँ की पूजा करते हैं?

आज नवरात्रि के आंठवे दिन नारी के रूप में विराजमान भगवती माँ और महिला समस्याओं पर एक वेदना कल स्त्री के रूप में विराजमान भगवती पर अंग्रेजी में कविता Do we really worship Devi Maa? लिखी थी, उसीका यह हिंदी रूपांतरण है देवी माँ की पूजा में हमारी प्रमुखता माँ की मूर्ती रूप में अर्चना, उसके संबंधी विधीविधान और उपवास  आदि पर होती है लेकिन, हमारी भक्ति तभी पूर्ण होगी जब हम महिलाओं पर हो रहे अत्याचार, भ्रूणहत्या और स्त्री-पुरुष समान अधिकारों के लिए निश्चित ध्येय के साथ ठोस काम आरम्भ नहीं करते

यह केवल कविता नहीं ह्रदय की वेदना है


क्या हम वास्तव में देवी माँ की पूजा करते हैं?
किस रूप में?
किस किस रूप में?
माँ, बहन, दोस्त, बेटी, पत्नी, एक स्त्री?
क्या हम उसकी पूजा करते हैं?
क्या हम स्त्रीत्व की पूजा करते हैं?

18 अक्तूबर 2015

प्रार्थना: चरणकमलों में गुरुदेव आपके

आज नवरात्री उत्सव के छठे दिवस निमित्त का स्तोत्र मेरे सद्गुरूदेव परम पूजनीय श्री नारायणकाकामहाराज को समर्पित है गुरुदेव ने शक्तिपात महायोग की दीक्षा से मेरा जीवन कृतार्थ कर दिया आध्यात्मिक जीवन देनेवाले मेरे गुरुदेव गुरुरूप में प्रकट माँ हैं गुरूदेव के देहत्याग के बाद  मैं अपने अज्ञानवश बहुत दुखी रहती थी सद्गुरू अपने शिष्य को कभी 
किसी भी समस्या में अकेला नहीं छोड़ देते, क्योंकी दीक्षा के साथ ही शिष्य के कल्याण का दायित्व वे लेते हैं; वे ले सकते हैं इसीलिए सद्गुरू होते हैं गुरुदेव की कृपा का स्मरण होता है तो मस्तक झुक जाता है, उनको प्रणाम करने के लिए मस्तक झुकते ही अहंकार रहता ही नहीं और सद्गुरुदेव के विराट सर्वव्यापी और सर्वसाक्षी रूप का परिचय होता है, इसलिए मेरी गुरुदेव से यही प्रार्थना है...  
Image: H. H. Shri Narayankaka Dhekane Maharaj


गुरूदेव की प्रतिमा का दर्शन कर या उनका स्मरणमात्र करनेसे ही लगता है, वे तो हमारे साथ ही हैं, यहीं


चरणकमलों में हे गुरुदेव आपके 
शीष सदा मेरा झुका रहे || 

17 अक्तूबर 2015

प्रार्थना: तेरी शरण में हूँ माँ

आज नवरात्री उत्सव का पांचवा दिन है आज की प्रार्थना विशेष रूप से मेरे परिवार की कुलस्वामिनी मनसादेवी या मनुदेवी के लिए मेरे मनमें आई

14 अक्तूबर 2015

प्रार्थना: साधन में दृढ़ निष्ठा देना

नवरात्रि उत्सव चल रहा है जगदम्बा माँ की आराधना में हमारे दिन और रात भक्तिमय हो रहे हैं। आज चैतन्यपूजा में भगवती की प्रार्थना में एक स्तोत्र यह प्रार्थना माँ से साधना में दृढ़ निष्ठा बनी रहे इसलिए विशेषरूप से मेरे मन में आई 

10 अक्तूबर 2015

कविता: हारना चाहती हूँ तुम्हारे लिए

आज कुछ काव्यपुष्पों की या कहूं की भावनाओं की पंखुडियां ट्वीट की थी| उन्हींका विस्तृत हिंदी रूपांतरण ...

शनिवार की शाम,
न कोई काम,
न दिल को आराम 
कुछ खालीसे बहके ख्याल 
अब आगे क्या?

09 अक्तूबर 2015

हाँ, मैं एक कवी हूँ

आज की कविता, काव्य और कवियों को समर्पित है; शब्दों और कलम की शक्ति को समर्पित है

07 अक्तूबर 2015

क्या 'मानवता' मात्र एक शब्द बनकर रह गया है?

दादरी में अफवाह पर हत्या की घटना और उसपर स्वार्थ की घृणित राजनीती पर यह आलेख 

कविता: मृदुमना

कुछ ऐसेही आज लिखने का मन हुआ, 


आपका गुस्सा,
आपकी हताशा,
आपकी नफरत?

02 अक्तूबर 2015

कविता: कठपुतलियाँ या खिलौने?

आज की प्रस्तुति समाज के हर वर्ग के हर व्यक्ति के लिए है| अपने विवेक या अविवेक का आत्मपरीक्षण हर किसी ने करना चाहिए| 

30 सितंबर 2015

पितृ पक्ष है पूर्वजों से शुभाशीर्वाद पाने का पर्व

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृ पक्ष का आरम्भ होता है| बहुत लोग पितृ पक्ष अशुभ मानते हैं; किसी भी शुभ कार्य के लिए तो यह १५ दिन लोग वर्ज्य मानते हैं| क्या पितृ पक्ष अशुभ होता है? आखिर श्राद्ध को अशुभ क्यों माना जाता है? श्राद्ध से जुड़े हुए विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता आजका आलेख|

26 सितंबर 2015

गणेशप्रार्थना: हे विघ्नहर्ता, सुनो आर्त प्रार्थना

आज की प्रस्तुति में गणेशजी से मन में बसनेवाले सूक्ष्म विघ्नों को दूर करने के लिए आर्तभावसे प्रार्थना मन को पीड़ा देनेवाले अन्तस्थ विघ्न यदि दूर हो गए तो बाहर के विघ्नों से जीवन पर विपरीत परिणाम नहीं हो सकता गणपती बाप्पा से प्रार्थना करे तो उनके लिए किसी भी  तरह के विघ्नों को दूर करना कौनसी बड़ी बात है

Image: Red Hibiscus Flower

प्रतिमा: कृष्णमोहिनी प्रतिमा संग्रह 

हे विघ्नहर्ता, सुनो आर्त प्रार्थना
साधनविघ्नों का अब अंत करना १ 

23 सितंबर 2015

गणेशस्तोत्र: भक्त कल्याणजन्म पाए

एक नई प्रार्थना के साथ इस गणेशोत्सवमें हर दिन का आरम्भ हो रहा है| आजकी प्रार्थना सर्वप्रथम पूजे जानेवाले भगवान गणेशजीकी स्तुति में है| गणेशोत्सव के दस दिन जैसे आसमान, हवा, पानी सबकुछ भगवानजी की पूजा में लीन हो, इतना पवित्र हो जाता है| इसी दिव्यता और पवित्रता का वर्णन इस स्तोत्रमें,

21 सितंबर 2015

कविता: मूक अश्रुओं की प्रार्थना

गणेशोत्सव निमित्त आज की प्रस्तुति ‘मूक अश्रुओं की प्रार्थना’ है| जो आँसू मूक होते हैं, वे न तो कभी-कहीं-किसीको दिखाई देते हैं और न ही उनकी कोई आवाज होती है| अगर उन अश्रुओं को कभी आवाज मिली और उन्होंने भगवान गणेशजीसे प्रार्थना की तो वह शायद ऐसी होगी...

17 सितंबर 2015

प्रार्थना: नमन तुमको हे गजानन

चैतन्यपूजा में जुड़े हुए सभी मित्रों को गणेश चतुर्थी और गणेश उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ| आज की प्रस्तुति हम सबके प्यारे गणपति बाप्पा की प्रार्थना में स्तोत्र है|

15 सितंबर 2015

हिंदी भाषासे संबंधित अचर्चित मुद्दे

कल हिंदी दिवस संपन्न हुआ। हिंदी भाषा के विषय पर कुछ विचार और प्रश्न आपसे बाँट रही हूँ
हिंदी में संस्कृत शब्द आएं तो इसे अनुचित समझा जाता है, क्योंकी माना जाता है कि हिंदी में संस्कृत शब्द कभी नहीं थे। हिंदी में फारसी और अरबी शब्द हो तो उसे हिन्दुस्तानी कहा जाता है।संस्कृत या अन्य स्थानीय भाषाओं का भी इसमें अंतर्भाव है ऐसा माना जाता है। लेकिन, संस्कृत शब्दों का प्रयोग दिखे तो विवाद भी उत्पन्न होता है। मैं इस विषय के आरम्भ में यह बताना चाहूंगी कि मुझे उर्दू या उससे भी अधिक अरबी और फ़ारसी बहुत अच्छी लगती है। परन्तु, जो मुद्दा भाषा का है, उसमें और भी कुछ अंतर्निहित मुद्दे लगते हैं जो चर्चा में नहीं आते, इसलिए उनकी चर्चा हिंदी के विषय के साथ ही करना मुझे आवश्यक लगता है

13 सितंबर 2015

कविता: इसी शहरमें ...

जहाँ अपने दोस्त हो, वहाँ जैसे भी हालात हो कुछ परेशानी नहीं होतीऔर जहाँ अपने न हो वहाँ...

इसी शहरमें,
हम मिलते थे कभी,
बातें करते थे
आज केवल अकेलापन है...

07 सितंबर 2015

कविता: संवेदनहीनता

आज के दौर में हमें भावनाओं की गहराई से ज्यादा गहरी संवेदनहीनता देखने को मिलती है, किसानों की आत्महत्या के विषय पर छोटीसी कविता,


हर नए दिन की ख़बर वही
"सूखे से किसानों की आत्महत्या!"
अब परेशान नहीं करती जरा भी
हमारी ही
गहरी संवेदनहीनता  

05 सितंबर 2015

कविता: हे ईश्वर, तुम्हारे लिए

जन्माष्टमी के पावन पर्व पर सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएँ| आपका आजका पर्व का दिन बहुत उत्साह से भक्तिमय हो यही भक्तों के प्यारे, हम सबके कृष्ण से मेरी प्रार्थना| आज की प्रस्तुति नवविधा भक्ति का सर्वोच्च रूप जिसे माना जाता है, उस आत्मनिवेदन भक्ति पर है|

31 अगस्त 2015

कविता: हत्याएँ तो हररोजही होती रहती है...

आजकल हत्याएँ बहुत चर्चामें है| कोई लेखक की हत्या कैसे कर सकता है? कोई माँ अपनी बेटी की हत्या कैसे कर सकती है? पर उन हत्याओं के बारे में मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी है| मुझे तो उन हत्याओं के बारे में बात करनी है जो रोज हमारे सामने होती है| वैचारिक हत्या! आत्मा की हत्या!

26 अगस्त 2015

...यही काव्य में जीना है

काव्य, जीवन के कटु - मधुर अनुभव और इन अनुभवों को साक्षी भाव से देखकर आनेवाली अंत:स्थिरता इनपर आजकी काव्यप्रस्तुति| जिन्दगी के सुख और दुःख, दोनों के, पलों में दिव्य शब्दों ने मुझे शक्ति दी; साथ दिया| इन शब्दों के लिए, इनके प्यार के जितना भी लिखा जाए, कम ही है...  


Image for Hindi Poem: Yahi Kavya Mein Jeena Hai


शब्दों में जीना,

हर रंग में शब्दों के जीना 
यही कविता है...

28 जुलाई 2015

कविता: अनासक्ति

कभी कभी सोच सोचकर भी एक थकान सी आती है विशेषत: ऐसा तब होता है, जब हम किसी समस्या का समाधान खोज नहीं पाते और ऐसा लगता है कि शायद अब कोई रास्ता नहीं ऐसा कभी हो नहीं सकता कि किसी समस्या का कोई समाधान न हो पर बहुत विचार करने के कारण कभी कभी ऐसा लगता है ऐसी स्थिति में लोग अलग- अलग दृष्टिकोण अपनाते हैं, उन्हींका वर्णन करती और सकारात्मक दृष्टि से समस्या की ओर देखने के लिए प्रेरित करनेवाली कविता ...

मन के आसमान में एक क्षितिज
ऐसा कभी आता है
विचार जहाँ रूक जाते हैं
एक घना अँधेरा छा जाता है
एक तरफ तो जिन्दगी
समस्याओं से भरी
और दूसरी ओर है शांति ही शांति
जीवन के मृत्यु से आनेवाली?
या विचारों के मृत्यु से आनेवाली?
क्या है उस क्षितिज के पार...?
क्या है इस घने अँधेरे के पार...?
या फिर हो सकती है शांति
अनासक्ति की!
शांति....
समस्याओं के कोलाहल में
अथांग बहती शांति...

अनासक्ति

यह कविता मेरे अन्य ब्लॉग पर प्रकाशित अंग्रेजी कविता Horizon का हिंदी रूपांतरण है

आध्यात्मिक और प्रेरणादायी आलेख/कविताएँ:


13 जुलाई 2015

कविता: शांति-स्वर

हर संध्या बहुत सुन्दर होती ही है ऐसा नहीं..लेकिन प्रत्यक्ष निसर्ग सौन्दर्य के बिना भी सौंदर्यानुभव और उदासी में भी शांति का गहरा अनुभव लाता आज का काव्य ....शांति-स्वर 

02 जुलाई 2015

कविता: अनकही भावनाएँ

आज की कविता का विषय है, 'अनकही भावनाएं' बहुत बार ऐसा होता है कि हम वह बात नहीं कह पाते जो हमारे मनमें है और कभी कभी तो जिंदगीभर कह नहीं पाते वह बातें, सुख-दुःख की भावनाएं कहीं न कहीं अन्दर ही दबी रह जाती है इसी विषय पर एक काव्यात्मक कथा..

काश कभी मैं बात कर पाती
अपना दर्द तुमसे बाँट पाती

28 जून 2015

कविता: प्यार होता है...

प्यार के बारे में कुछ लिखना या इस सुंदरसी भावना की व्याख्या करना अगर चाहे तो अपने आप कविता ही बन जाती है...यह प्यार क्या होता है..इसी पर आजकी कविता यह कविता मेरी मराठी कविता "प्रेम म्हणजे.." का हिंदी रूपांतरण है  

24 जून 2015

हलकी हलकी बारिश की दीवानगी

आखिरकार बारिश शुरू ही हो गई| एक सप्ताह तक बस बादल आते थे, ऐसा लगता था अभी बारिश होगी लेकिन, फिर कुछ नहीं| लेकिन बादमें हलकी हलकी बारिश का मजा लेने का मौका मिला गया| इसी बारिश की दीवानगी की कहानी...

02 जून 2015

कविता: ...तो मुझसे बात करो

आदर्श मित्रता कैसे होती है? बस...साथ देना! अपने दोस्त को साथ देना, अच्छे बुरे समय में हर वक्त 'मैं तुम्हारे साथ हूँ', यह एहसास ही दोस्ती को इतना खास बनाता है  इसी एहसास पर एक प्यारी सी कविता...

29 मई 2015

हिंदी कविता: प्यार की कलियाँ

प्यार के लिए प्यार ने प्यार से लिखी प्यारीसी कविता| यह कविता हमारे मराठी ब्लॉग विचारयज्ञ पर 'प्रेमफुलं फुलताना' का हिंदी रूपांतरण है| 

28 मई 2015

स्वातंत्र्यवीर सावरकर: क्रांति के महासूर्य

आज क्रांति के महासूर्य स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी की जयन्ती है| पाठशाला में सावरकरजी के ‘माझी जन्मठेप’ (मेरा आजीवन कारावास) का कुछ अंश हमें मराठी विषय में अध्ययन के लिए था| ‘माझी जन्मठेप’ में  अंदमान के काले पानी का विस्तृत वर्णन है| मैनें पहली बार वो अंश पढ़ा तबसे सावरकरजी के नेतृत्व और लेखन ने मुझे बहुत प्रभावित किया| आज मुझे बहुत प्रसन्नता लग रही है कि मैं उन्हीं सावरकरजी के बारे में उन्हींके प्रभाव से उनके कार्य के कुछ पहलुओं पर लिखने की धृष्टता कर रही हूँ|

26 मई 2015

कविता: क्या ये अच्छे दिन नहीं हैं तेरे लिए?

आज हम सबकी जिन्दगी में अच्छे दिन आकर पूरा एक साल हो गया| अभी भी ऐसा लग रहा है मानो कल की बात हो, कल जश्न मनाना शुरू किया था और अभी भी जश्न ही मना रहे हैं...

इसी पर आज की कविता, हाँ! हाँ!! हम सबके अच्छे दिनों पर...

22 मई 2015

कविता: दिल के शब्द

दिलसे जो भावनाएं  उठें वही लिखना मुझे अच्छा लगता है अच्छा क्या, इसके अलावा कुछ और मुझसे लिखा ही नहीं जाता  शब्द, उपमाएं और भाव भगवान की कृपा के बिना लिखना संभव है ऐसा मुझे नहीं लगता फिर भी कभी कभी लगता है आज 'रचना' क्यों न की जाए, जिसमें वो न हो जो दिल लिखना चाहता है या मैंने सोचा दिल को कुछ और सोचने पर मजबूर करूं देखिए क्या कविता में ऐसा 'प्रयोग' हो सकता है? 

18 मई 2015

कविता: प्यार

आज प्यार की गहरी बात, बहुत ही कम शब्दों में 

17 मई 2015

कविता: महक

फूल, काव्य और प्रेम इनका एक अटूट रिश्ता है आज का काव्य इन्हीं पर कहानी ऐसी है कि प्रेमिका बरसों से दूर देस गए अपने प्रियतम को याद करती है इन यादों में दुःख या उदासी नहीं हैं विरह कभी कभी आनंद भी दे सकता है, खास कर तब जब यादों की महक महसूस हो

15 मई 2015

कविता: बूंदों का युद्ध

परसों अचानकसे तेज हवा चलने लगी, बादल गरजने लगे और बारिश हुई मुझे बहुत मजा आया गर्मी से राहत भी मिली इस सुंदरसी वर्षा पर मराठी में मैंने "थेंबांचं युद्ध" कविता ब्लॉग पर पोस्ट की थी, उसीका हिंदी रूपांतरण यह कविता पढ़कर आपको जरूर बचपन याद आ जाएगा  

काले काले
बादलों का आक्रमण

11 मई 2015

कविता: क्यों याद आज फिरसे उनकी आई?

आज शाम को हल्की हल्की बारिश हुई और मौसम बहुत ही खुबसूरत रहा धुप खिली भी थी और बारिश भी...ऐसे सुहाने मौसम में क्या कविता हो सकती है? ..आज की कविता इस धुप की राहत इस बारिश पर..

10 मई 2015

कविता: चलते रहना है तब तक

आज हमारे पास खुशियाँ मनाने के दो कारण हैं सोचिए सोचिए..! चैतन्यपुजा की यह १०० वी पोस्ट है और चैतन्यपुजा वेब साईट का पता अब चैतन्यपुजा डॉट कॉम (chainyapuja.com)है है न ये ख़ुशी मनाने वाली बात? आज की खुशियों के नाम ही है आज की कविता: "चलते रहना है तब तक"

07 मई 2015

कविता: तारीफ़ में शायरी क्या लिखे हम आपकी

कविता न हो तो बहुत सूना सूना लगता है  है न? अभी एक शब्द मन में था , 'अफसाना' और फिर एक कल्पना मन में आई जरा देखिए तो कैसी सजी है वह कल्पना और कविता "तारीफ में शायरी क्या लिखे हम आपकी"

समाज पर चढ़ता डीजे का नशा

विवाहों का मौसम चल रहा है और विवाह अर्थात बारात और बारात मतलब डीजे! तो गर्मी के प्रकोप के साथ साथ डीजे का प्रकोप, शोर और अश्लील गानों का कहर चल रहा है। यहाँ तो यही हालत है। अभी जब मैं यह लिख रही हूँ, बाहर डीजे चल ही रहा है। शायद यही सबसे अच्छा समय है, इसके बारे में कुछ चर्चा करने का! आज डीजे के बारे में ही चर्चा करते हैं।