Search

28 नवंबर 2014

कविता: ठण्ड ठण्ड ठण्ड


खुबसूरत सी ठण्ड शुरु हो गयी है, और मुझे यह ठण्ड बहुत प्रसन्न करती हैं क्योंकी हमारे यहाँ साल के अधिकतर समय गर्मी ही बहुत होती है | 

ठण्ड के नाम कुछ पंक्तियाँ..  


ठण्ड ठण्ड ठण्ड
सुबह शाम दिन रात

25 नवंबर 2014

दलित अत्याचारों पर 'चुप्पी' क्यों?

इस दिवाली में जब हम अपने मित्रों और परिवार के साथ खुशियाँ मना रहें थे, महाराष्ट्र में एक दलित परिवार में तीन लोगों के हत्याकांड का समाचार आया| हत्याकाण्ड भीषण था, एक ही परिवार के तीन लोगों को मारकर उनके टुकड़े टुकड़े कर दिए गए थे|

इस तरह की दिल दहला देने वाली घटनाओं के समाचार हम सुनतें हैं!

जात पंचायत के क्रूर आदेशों की घटनाएँ भी सुनने में मिलती है!
इसके अलावा ऐसी घटनाओं के बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के भी समाचार मिलतें हैं |
......

लेकिन, आगे क्या होता है?

04 नवंबर 2014

प्यार भी अजीब पागल है...

प्रेम में पागल प्रेमी क्या क्या सोचतें है, लोग उन्हें बिलकुल पागल मानतें हैं पर उस पागलपन में वो कितने खुश हैं यह तो वही जाने....

ऐसीही कुछ सुंदर, प्यारीसी और मीठीसी भावनाओं पर यह काव्य,

प्यार भी अजीब पागल है 
क्या क्या खयाल दिल में लाता है