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10 सितंबर 2014

...अब तो इन्सानियत के हिमायती बन

भारतीय सेना ने काश्मीर में ७६५०० से अधिक लोगों की जान बचायी है. और भारतीय सेना का राहतकार्य दिन रात चल रहा है. अलगाववादियों की नफरत का निशाना भारतीय सैन्य हमेशा से रहा है. नफरत से भरे इस दुष्प्रचार में आंतरराष्ट्रीय प्रसारमाध्यम भी हमारी सेना के विरुद्ध बोलने से नहीं चूकते. 

आज सच्ची इन्सानियत किसने दिखाई है, यह सब देख रहें हैं फिर भी सेना का कर्तव्य क्या है यह पृथकतावादी समझा रहें हैं. अलगाववाद की नफरत का जहर एक क्षण के लिए भी थमता नहीं.  

इसी  विषय पर दिल से निकली यह आवाज ...
 
(सौजन्य:  रेडीफ.कॉम इसी लिंक पर आप भारतीय जवानों की वीरता और मानवता की और तस्वीरें देख सकतें हैं  )

जिनसे तुमने नफरत की है जिंदगीभर
उन्होनेही आज जान बचाई है तुम्हारी
अब तो आँखे खोल
ऐ नफरत के सौदागर
अब तो इंसानियत के  हिमायती बन
छोड़ दे हथियार, छोड़ दे नफरत की जुबान
अब तो मातृभूमी से प्रेम करना सीख
नफरत इस कदर फैलाई है तूने
अमन चैन दिलों से मिटाकर
अपने ही भाइयों की जन्नत उजाड़कर
आझादी का मसीहा बनने की कोशिश मत कर
दहशतगर्दी से तेरी तूने नाइन्साफी की है
इन्साफ देने के नाम पर
आझादी का मसीहा बनने से पहले
इन्सानियत के हिमायती बन...
किसको धोका दे रहा है तू
यह तो पहले सोच ले
मासूम जानों के ख्वाब उजाड़कर
इन्साफ दिलाने की बात मत कर
जब जवान दिलों में सपने सजतें हैं
खूबसूरत जिन्दगी के
तूने हथियार थमा दिए उन हाथों में
नफरत की बीज बो के
हाँ! नाम शोहरत मिल रही है
तुझे सत्ता के खेल में
लेकिन देख तो जरा एक बार
तेरी नफरत ने सपने उजाडें हैं
उन मासूम दिलों के
ऐ जालीम! ऐ नफरत के सौदागर
तू इन्सानियत की जन्नत से
अपने भाईयों को महरूम मत कर
दहशतगर्दी का जहर छोड़ दे अब
अब तो....
इंसानियत के हिमायती बन...



यह काव्य अधुरा है...

यह तब पूरा होगा जब नफरत की बीज बोने वाले मानवता का महत्त्व समझेंगे और अपनी भूल को सुधारेंगे...



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