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18 सितंबर 2014

आज मैंने क्षितिज छू लिया ...

एक अनजान रास्ता जो कहाँ जाएगा ये पता नहीं, मंझील का विचार मन में नहीं,
दोनों तरफ लहलहाते खेत, खेतों के बाहर छोटे छोटे हँसते मुस्कुराते फूल जिनका शायद कोई नाम नहीं.. 

और सर पे दूर दूर तक केवल खुला आसमान...

सपना सा लगता है न?  

बस ऐसाही हुआ मेरा अनजान सफ़र 

Mumbai-Agra Highway



और फिर ह्रदय ने गाया यह गीत...

10 सितंबर 2014

...अब तो इन्सानियत के हिमायती बन

भारतीय सेना ने काश्मीर में ७६५०० से अधिक लोगों की जान बचायी है. और भारतीय सेना का राहतकार्य दिन रात चल रहा है. अलगाववादियों की नफरत का निशाना भारतीय सैन्य हमेशा से रहा है. नफरत से भरे इस दुष्प्रचार में आंतरराष्ट्रीय प्रसारमाध्यम भी हमारी सेना के विरुद्ध बोलने से नहीं चूकते. 

आज सच्ची इन्सानियत किसने दिखाई है, यह सब देख रहें हैं फिर भी सेना का कर्तव्य क्या है यह पृथकतावादी समझा रहें हैं. अलगाववाद की नफरत का जहर एक क्षण के लिए भी थमता नहीं.  

इसी  विषय पर दिल से निकली यह आवाज ...