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24 नवंबर 2013

साधक की प्रार्थना

हिंदी ब्लॉग के रूप में चल रही चैतन्यपुजा को आज तीन वर्ष पुरे हुए...विश्वास नहीं होता 'यश दो हे भगवन्' इस प्रार्थना से इस  ब्लॉग का प्रारंभ हुआ और आज तीन वर्ष हो गए, भगवान ने यथार्थ में यश से परिपूर्ण लेखन मुझसे लिखवा के मेरा जीवन धन्य कर दिया ब्लॉग या लेखन का यश यह यथार्थ रूपसे यश है यह बार बार यहाँ और अन्य ब्लॉग पे भी अधोरेखित करने का कारण यह है की वास्तव में पूजा वह है जिससे मन में उठते अनंत तरंग शांत हो एक अद्भुत आनंद का अनुभव हो और जब यह अनुभव केवल कुछ क्षणों या कुछ समय के लिएहि न रहकर जीवन के हर क्षण का ही अनुभव बन जाए, जीवन ही आनंदमय बन जाए तो वह यश शाश्वत है और मनुष्यदेह का सार्थक भी है ऐसा यश और आनंदामृत का पान करानेवाला दिव्य लेखन लिखने की क्षमता मुझमें नहीं है, ना मेरी वह योग्यता भी है, परन्तु फिर भी ऐसा हो रहा है और तीन वर्षों से भी अधिक समय से सहज ही हो रहा है इसमें श्रीसद्गुरुदेव की कृपा हे एकमेव कारण है