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27 जनवरी 2013

सफल कर्मरहस्य

नमस्ते बंधुओं और भगिनियों| बहुत दिनों से कुछ हिंदी काव्य लिखा नहीं। आप सबका बहुत स्मरण होता था, कुछ न कुछ लिखने का मन करता था पर लिख नहीं पाते थे। आज बहुत दिनों बाद चैतन्यपूजा में हिन्दी की सेवा तथा काव्यसाधना हो रही है और मन अतिशय प्रसन्न है।