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30 सितंबर 2012

जीवन - एक महाकाव्य


मेरी अंग्रेजी कविता 'एपिक ऑफ़ द लाइफ' का मराठी रूपांतरण 'जीवन एक महाकाव्य' आपने कदाचित पढ़ा होगा, उन्ही काव्यों का यह हिंदी रुपंतारांतरण आज आपके समक्ष प्रस्तुत करने में आनंद हो रहा है | आशा है आपको यह प्रस्तुति मनभावन लगेगी| 


जीवन यह है एक मधुर काव्य
हर क्षण लिखे यह कोई श्लोक सुन्दर
प्रेम शांति के भावना इनमें
ह्रदय से प्रकटे नव आल्हाद लेकर


हर श्वास बन जाये
उत्सव जीवन का
ईश्वर को समर्पित
प्रेम भक्ति भाव का

छंद यहाँ मिल रहे प्रेम के
श्लोक मधुर स्मित के
होंठों पे झलकतें हैं

नयन गातें हैं गीत यशका
और ह्रदय रचे संगीत प्रेमका
ताल है इस गीत में
दिव्य परमानन्द का
होठों का स्मित है रूप
ह्रदय शांति का

अध्यात्म यहाँ बना है
जीवनका महाकाव्य
प्रारब्ध इसके सुर में ही मिल जाये
ऐसा यह जीवन का महाकाव्य

द्वेष मत्सर पिघल जाए
प्रेम के दिव्य आनंदसागर में
आत्मा का मुक्त स्वातंत्र्य प्रकटे ऐसे
जैसे खग उड़ रहा हो मुक्त आकाश में

इच्छाओं का फिर अंत हो जाए
प्रेम की परिपूर्ति में
यह लेकिन वर्धिष्णु हो
प्रेम की छाया जैसे

जीवन यह बन जाए महाकाव्य
एक दिव्य सुन्दर महाकाव्य
एक दिव्य सुन्दर महाकाव्य 

5 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. नमस्ते शालिनी जी| चैतन्यपूजा में आपका स्वागत है| आपकी ह्रदय से आभारी हूँ |

      हटाएं
  2. उत्तर
    1. नमस्ते डा. मोनिका जी| चैतन्यपुजा में आपका हार्दिक स्वागत | बहुत बहुत धन्यवाद|

      हटाएं
  3. मुझे आपकी कविता बहुत पसंद आई ।अगर मौका मिले तो मेरी भी कविता ज़रूर पढियेगा ।

    उत्तर देंहटाएं

चैतन्यपूजा मे आपके सुंदर और पवित्र शब्दपुष्प.........!