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12 जून 2012

प्रथम वर्षा, मन यह हरषा


बहुत दिनों से आपसे ना मिलने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ। स्वास्थ्य कुछ ठीक नहीं था। 

आज का गीत इस वर्ष की प्रथम वर्षा को समर्पित है। आज अचानक से बदल घिर आये, काले काले , कृष्ण जैसे और वर्षा होने लगी । मन में वर्षा हुई काव्य की और प्रेम की कृष्णप्रेम की । 
इसी प्रेम की माधुरी से भरा यह गीत । आशा है आपको अवश्य अच्छा लगेगा । 



घर से ली हुई प्रतिमा ।
प्रथम वर्षा, मन यह हरषा
गीत कोई मन यह गाया