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24 नवंबर 2011

कविता: यश दिया है तुमने


मेरे प्यारे सम्मानित मित्रों! आप सबको नमन शतशः आज हमारी चैतन्यपूजा को एक वर्ष पूर्ण हुआ है एक वर्ष पूर्व इस पूजा की अभिव्यक्ति ब्लोगिंग जगत में आरम्भ हुई पहले तो अंग्रेजी ब्लाग गुरुकृपा आरम्भ हो चूका था, सोचा कुछ काव्य हिंदी में प्रस्तुत किये जाय हिंदी साहित्य यह मेरे जैसे अभियंता का विषय नहीं हैव्याकरण में तो कुछ ना कुछ गलती होने का भय मुझे हमेशा रहता है पाठशाला के कुछ वर्ष ही हिंदी अभ्यास हुआ था, और बाद में गीताप्रेस की पुस्तकों ने शुद्ध हिंदी का ह्रदय से परिचय करा दिया

20 नवंबर 2011

एक शब्द प्यार का

मेरे अंग्रेजी ब्लाग गुरुकृपा पे प्रकाशित 'द वर्ड ऑफ लव - The Word Of Love' काव्य अब हिंदी में 


Image: Wilde Flowers


एक शब्द प्रेमका
जीवन बदल देगा
एक शब्द आशाका
हर दुःख मिटा देगा
एकही शब्द

10 नवंबर 2011

हे गौमात:! मुझे क्षमा करना|


पिछले आलेख गौहत्या -मानवता पे कलंक में हमने गौहत्या की चर्चा की, इसी विषय को जरा और विस्तार से देखें| 

दिनांक ७ को गौमाता की सामूहिक हत्याओं की प्रतिमाएँ देखनेका पाप हो गया| एक विशाल मैदान हैं, रक्त की नदियाँ बह रही है और गौमाता की सानंद हत्या का उपक्रम निष्ठां से चल रहा है| नहीं लिखा जाता दु:ख! किसी और दृश्य में एक पर्व का हर्षोल्लास मनाने के लिए गौमाता के मस्तक काट के पंक्तिबद्ध सजाएं गएँ हैं| साथ में रक्त की नदियाँ पवित्रता (!) निर्माण करती हुई|

07 नवंबर 2011

गौहत्या - मानवता पे कलंक

आज का विषय गौहत्या है| मुझे बचपनसेही गोहत्या के विषय में बहुत पीड़ा रही है| परन्तु बड़े होने पे पता चला की यह हिंदुत्व का विषय माना जाता है| अर्थात इसके बारेमें कुछ भी बोलना अपराध समझा जायेगा| मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा की फिर मै अपनी पीड़ा कैसे अभिव्यक्त करूँ| यह हमारेही संकुचित विचार है, जो हर सामाजिक, राष्ट्रीय या सांस्कृतिक समस्या को हिंदुत्व, साम्प्रदायीकता ऐसे तरह तरह के नाम देते हैं| यह समस्या से भागने का एक द्वार भी है|

फिर भी आज मुझे लगा की मैं अपनी वेदना आपके साथ बाटूं| कृपया इसे किसी पूर्वग्रह के बिना केवल एक आम भारतीय की व्यथा की दृष्टि से देखिएगा|