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21 अक्तूबर 2011

राष्ट्रधर्म है बढ़ाना

हमें बरसों से अहिंसा का पाठ पढाया जा रहा है| शौर्य की निंदा हमारे मन - मस्तिष्क में बिठाई गयी है| हमें हमारे गौरवशाली इतिहास से अनभिज्ञ रखा गया है| हमारे वीरों ने अतुलनीय शौर्य से सदैव इस राष्ट्र की रक्षा की है| भारतीयों के शौर्य की कहीं तुलना नहीं| परन्तु हमें स्वाभिमान हीन बनने के लिए, मनसे सदैव गुलाम रखने के लिए मेकाले ने एक षड़यंत्र रचा| हमारी शिक्षाव्यवस्था ऐसी बनाई की हम हमारी संस्कृति पे गौरव करने के बजाय शर्म महसूस करें| अहिंसा की आड में हमें शस्त्रविहीन कर दिया गया| हमें गुलाम ही बनके जीना पड़ेगा, यही सिखाया गया| इसीका परिणाम है, की आज संदीप पाण्डेय और मेधा पाटकर हमारे ही राष्ट्र के सैन्य विरुद्ध यात्रा कर रहें हैं और हमें इस बात से जरा भी गुस्सा नहीं आ रहा| इस विषय की विस्तृत चर्चा इस आलेख में कृपया अवश्य पढ़ें राष्ट्रभक्ति  |

संविधान का उल्लंघन करने वाली हिंसा का मै समर्थन नहीं करती, परन्तु गुलाम बनानेवाली इस अहिंसा की मानसिकता का विरोध कर रही हूँ|

आज  की रचना इसी विषय पर,





राष्ट्र और धर्म को 
है समर्पित तन मन धन 
राष्ट्र संस्कृति रक्षा में 
है  समर्पित जीवन क्षण 
भ्रमित है जनता यहाँ 
भूलके  स्वाभिमान अपना 

गर्व से अच्छा लगता है इन्हें
कायरता, राष्ट्रद्रोह और अहिंसा जपना
इन्हें अब जगाना है
राष्ट्रधर्म अब बढ़ाना है
कायरता हमारा इतिहास नहीं
वीरता का स्मरण अब दिलाना है
वीर यहाँ का हर पुत्र है
वीरता हमारा धर्म है
शौर्य से प्रेम से जीता है जगको
अनशन की भीक हमारा धर्म नहीं
वीरता से परास्त कर देंगे
राष्ट्र के हर शत्रु को अब
भीरुओं की शंतिचर्चा करनेवाले हम नहीं
हमें गर्व है अपनी वीरतापर
शौर्य से शर्मिंदा होनेवाले हम नहीं
इतिहास के लुप्त पन्ने
हम फिरसे आज लिखेंगे
शौर्य का इतिहास हमारा
हम फिरसे दोहराएंगे
मिटा देंगे शत्रुओं को
मिटा देंगे कायरता को
राष्ट्रप्रेम से उत्फुल जीवन
भगवा फिरसे लहराएंगे हम
सैन्य जैसा युद्ध अब आम भी लड़ेगा
कायरता का झूठा इतिहास
शौर्य से मिटा देंगे
गीता का सन्देश हमने है समझा
आतताइयों को मारना
हमने है जान लिया
नहीं मिटने देंगे अखंडता
मेरे राष्ट्र की संस्कृति संप्रभुता
सनातन संस्कृति के चरणकमलो में
भारतमा के पदपद्मों में
विश्व को अब शीश झुकाना होगा
बहुत हुआ झूठ का प्रचार
बहुत हुआ अन्याय अत्याचार
गौरव से हमें है अब जीना 
छीना जिसने हक हमारा 
उसे  सबक है अब सिखाना 
भारत का गौरवशाली इतिहास
पुन: पुन: है दोहराना
पुन: पुन: है दोहराना

भगवा ध्वज यह राष्ट्रभक्ति का और सनातन संस्कृति का उद्धोष करनेवाला शब्द पढ़के आपके मन में स्वाभाविक शौर्य और राष्ट्रभक्ति आ रही है, या एक भय, हिंदू आतंकवाद, कट्टरता, दक्षिणपंथी  जैसे शब्द आ रहें हैं? अगर भय हो रहा है तो समझिए आपका Brainwash हो चूका है और आप अनजाने में राष्ट्रद्रोहियों के भक्त ‘बन चुके’ हैं| जागिये और हर तरह के भय को त्याग दीजिए| भगवा सांप्रदायिक ता का प्रतिक नहीं हैं| भगवान धर्मध्वज है , भगवा हमारा प्राण हैं, हमारा स्वाभिमान है|

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