Search

26 अक्तूबर 2011

दिपावली का दिव्य प्रकाश

यह दीपावली और नववर्ष आप सबको और आपके परिवार और मित्रजनोंको  चैतन्यमय, आनंदमय और सम्पन्नता से परिपूर्ण रहें ऐसी हार्दिक शुभकामनाएँ| आईये ज्ञान के दीप लगाएँ और सनातन संस्कृति का प्रकाश अखिल ब्रह्माण्ड में फैलाएँ|


जन जन में फैले ज्ञान का प्रकाश 
मिटे अज्ञान तिमिर हो मोहनाश
संपत्ति शुभलक्ष्मी हो अचल स्थिर 
शुभ गुणों से हो जनमन सुस्थिर 
राष्ट्र में हो एकता अखंडता 
राष्ट्रशत्रुओं का हो पूर्ण विनाश
दीपावली दे हमें पूर्ण प्रकाश
प्रेम,उत्कर्ष और सांस्कृतिक अभिमान 
विश्व में फैले शांति का प्रकाश

दीपावली  विशेष  मेरे मराठी ब्लॉग विचारयज्ञ पे ब्लॉग की प्रथम वर्षगाठ पे और इंग्रजी ब्लॉग गुरुकृपा पे .... 

21 अक्तूबर 2011

राष्ट्रधर्म है बढ़ाना

हमें बरसों से अहिंसा का पाठ पढाया जा रहा है| शौर्य की निंदा हमारे मन - मस्तिष्क में बिठाई गयी है| हमें हमारे गौरवशाली इतिहास से अनभिज्ञ रखा गया है| हमारे वीरों ने अतुलनीय शौर्य से सदैव इस राष्ट्र की रक्षा की है| भारतीयों के शौर्य की कहीं तुलना नहीं| परन्तु हमें स्वाभिमान हीन बनने के लिए, मनसे सदैव गुलाम रखने के लिए मेकाले ने एक षड़यंत्र रचा| हमारी शिक्षाव्यवस्था ऐसी बनाई की हम हमारी संस्कृति पे गौरव करने के बजाय शर्म महसूस करें| अहिंसा की आड में हमें शस्त्रविहीन कर दिया गया| हमें गुलाम ही बनके जीना पड़ेगा, यही सिखाया गया| इसीका परिणाम है, की आज संदीप पाण्डेय और मेधा पाटकर हमारे ही राष्ट्र के सैन्य विरुद्ध यात्रा कर रहें हैं और हमें इस बात से जरा भी गुस्सा नहीं आ रहा| इस विषय की विस्तृत चर्चा इस आलेख में कृपया अवश्य पढ़ें राष्ट्रभक्ति  |

संविधान का उल्लंघन करने वाली हिंसा का मै समर्थन नहीं करती, परन्तु गुलाम बनानेवाली इस अहिंसा की मानसिकता का विरोध कर रही हूँ|

आज  की रचना इसी विषय पर,

13 अक्तूबर 2011

खामोश पल


अध्यात्म  जानना और जीवन में सहजता से आना इसमें बहुत अंतर है| जानना पहली स्थिति है| पर सच्चा आनंद तो अध्यात्म जीवन में सहजता से आने में ही है | मै बचपन यह बातें पढ़ती आ रही हूँ की संसार में रहकर भी अध्यात्म ज्ञान मिल सकता है | पर मुझे यह संभव नहीं लगता, कुछ एकांत, सम्पूर्ण एकांत जीवन बदल सकता है| संसार से भागना संभव नहीं | पर कुछ एकांत अवश्य संभव है| इस एकांत से अध्यात्म जीवन में उतरता है| जो ज्ञान पुस्तकों से नहीं मिल सकता है, वह ईश्वर के साथ बिताएं कुछ शांत पलों से मिल सकता है|

आज ऐसेही कुछ एकांत और एक शांत पलों की बातें,

05 अक्तूबर 2011

विजयादशमी पर्व

कल विजयादशमी है | इस पर्व पर हम रावण का पुतला जला के धर्म की अधर्म पर विजय मनातें हैं| पर आज क्या हम धर्म और अधर्म का भेद समझ पातें हैं? क्या केवल रावण का पुतला जलाके ही हमारा कर्त्तव्य पूरा हो जायेगा? 

कुछ  विचार कुछ प्रश्न मन को अस्वस्थ कर रहें हैं|

धर्म का रहस्य ज्ञात न होनेसे, धर्म का रहस्य पाने की शिक्षा के अभाव से और पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव से आजकल हम अधर्म को ही धर्म मान बैठें हैं| हममें यह बुद्धिभेद दृढ़ करना और हमारी सनातन संस्कृति से हमें दूर ले जाना ही इस पाश्चात्य शिक्षा का मेकाले की शिक्षा पद्धति का उद्देश्य है| इसलिए यह अधर्म प्रेम हमारे ह्रदय में दिन दिन अधिकधिक दृढ़ हो रहा है|