Search

21 अगस्त 2011

प्रार्थना: हे राधेकृष्णा

जन्माष्टमी की आप सबको बहुत बहुत बधाई बहुत आनंद का उत्सव है, आज यशोदा के घर साक्षात् भगवान् आये हैं


यह मनमोहक छवी धुले - महाराष्ट्र के महानुभाव श्रीकृष्ण मंदिर की है बस पहली बार इन्हें देखा और ह्रदय बोल उठा..........




भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधाजी को समर्पित यह काव्य,

क़दमों में तेरे हमेशा
झुका रहे सर यह मेरा
हे राधेकृष्णा! हे राधेकृष्णा!
मन मोह लिया तेरी छविने
आशीष दिया आज तेरे प्रेमने
हे राधेकृष्णा! हे राधेकृष्णा!
संशय सारे आज मिट गए
प्रेम ह्रदयसे फिर खिल उठा
हे राधेकृष्णा! हे राधेकृष्णा!
मुरली यह तेरी मोहिनी जगमें
मुरलीने मोह लिया मुझे
हे राधेकृष्णा! हे राधेकृष्णा!
रूप सुन्दर मनमें छा गया
आज फिरसे कृष्णा मिल गया
बस इसी प्रेम में हैं अब मुझे रहना 
हे राधेकृष्णा! हे राधेकृष्णा!


राधाकृष्ण की भक्ति में लिखे और भी काव्य राधाकृष्ण इस विषयअंतर्गत इसी ब्लॉग से 


4 टिप्‍पणियां:

  1. a very happy JANMASHTAMI, your poem is wonderful. in the footsteps of sri krishna let us all burn the ego and flow in the ocean of love.

    उत्तर देंहटाएं
  2. Happy krishna janmashtami.. Here's a wonderful poem by you.. Lot's of wishes and love

    उत्तर देंहटाएं
  3. very very nice and lovely poem .....happy krishna janmashtmi.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. Sorry for being a little late here... Yahan aate hi man mein shanti si cha jaati hai..sach! Kanha ki sundar chavi aur apke manmohak shabd bahut sukun ka ehsas kara rahe hai...dhanyawad :)

    उत्तर देंहटाएं