Search

27 जुलाई 2011

मनोजय कैसे हो ?

मनोजय कैसे हो? कैसे करें यह प्रश्न नहीं है | करना यह मन के दायरेमे आता है और जहाँतक मन है, मनोजय संभव नहीं|

तो मनोलय ही मनोजय है| परन्तु यह मनोलय कहाँ हो यह एक प्रश्न उठता है ? ईश्वर के नामस्मरण में रममाण हो, जब मन अपने आप शांत हो जाता है, वाणी का बोलना बंद होता है यही मनोलय है | मन रहा ही नहीं तो विजय किसपे प्राप्त करेंगे | मनसे लड़नेसे मनोजय संभव नहीं|



गुरुदेव जलगाँव में विज्ञान और अध्यात्म पर बोलते हुए - बाये शास्त्रज्ञ डा. विजय भटकर  


कुछ देर शांत बैठके देखिये| श्वास अन्दर जा रहा है, बाहर आ रहा है.......बस आप देख रहें हैं| किसी विशिष्ट प्रकार का कोई प्राणायाम नहीं| बस शांतिसे ३ से १८ मिनिट बैठें और देखिये| मन श्वास में विलीन हो जाता है , अपने आप|

आपने तो कुछ किया भी नहीं| पहले शायद विचारों का एक तूफान आये, पर वह भी मिट जाता है और एक अद्भुत शांति का उगम अंतर से होता है, बाहरसे नहीं| बाहर का कोई सुख साथ में नहीं फिर भी यह सुख अंतरसे उठता है| आनंदका सागर खिलखिलाता है, परन्तु शांति ऐसी अनुभूत होती है की बोलने का मन नहीं करता| बस आनंदामृत का पान होता रहता है| यही सच्चा प्राणायाम है| यही समाधी है| यही जीवन्मुक्ति है| पहले थोड़ी देर यह अनुभव होता है, फिर रोज फिर बार बार ....समय बढ़ता जाता है| यह सब हमें हमारे सदगुरुदेव परम पुजनीय श्री नारायणकाकामहाराज ने सिखाया है|


यह महायोग का पूर्वाभ्यास हैमहायोग की अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है| यह सब आप स्वयं अनुभव करके देखें| गुरुदेवने इतना महान विचार विश्व के सामने रखा है, परन्तु वह यह पैसे के लिए नहीं है| यह सब बताने के या दीक्षा देने के वह पैसे नहीं लेते| प्राणायाम कोई व्यवसाय नहीं है| गीता में दिए इस महान सन्देश का व्यवसाय होना भी नहीं चाहिए| 

हमारे गुरुदेव के गुरुदेव परमहंस परिव्राजकाचार्य १००८ श्री लोकनाथतीर्थ स्वामी महाराज जी की संस्कृत प्रार्थना - मेरे द्वारा प्रथम संस्कृत रचना - नमस्ते नमस्ते प्रभो लोकनाथ !


2 टिप्‍पणियां:

  1. Apke lekh padhke, bhi mujhe aanandamrit ke paan ki sukhad anubhuti hoti hai...sundar prastuti :-)Apke lekh padhke, bhi mujhe aanandamrit ke paan ki sukhad anubhuti hoti hai...sundar prastuti :-)

    उत्तर देंहटाएं
  2. आरतीजी| देरी के लिए ह्रदयसे क्षमाप्रार्थी हूँ| ...आपको शत शत नमन| हमारा कुछ नहीं, प.पू.गुरुदेव के प्रवचन सुनके यह सब मनमे आया, पहले समझ में नहीं आता था, तो इस विषय पे नहीं लिखती थी|

    उत्तर देंहटाएं

चैतन्यपूजा मे आपके सुंदर और पवित्र शब्दपुष्प.........!