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27 जुलाई 2011

मनोजय कैसे हो ?

मनोजय कैसे हो? कैसे करें यह प्रश्न नहीं है | करना यह मन के दायरेमे आता है और जहाँतक मन है, मनोजय संभव नहीं|

तो मनोलय ही मनोजय है| परन्तु यह मनोलय कहाँ हो यह एक प्रश्न उठता है ? ईश्वर के नामस्मरण में रममाण हो, जब मन अपने आप शांत हो जाता है, वाणी का बोलना बंद होता है यही मनोलय है | मन रहा ही नहीं तो विजय किसपे प्राप्त करेंगे | मनसे लड़नेसे मनोजय संभव नहीं|

15 जुलाई 2011

कविता: राम राम है पति मेरो

अभी कुछ दिनों पहले मीरा’ चलचित्र देखा| संत मीराजी के बारे में कुछ भी पढ़ें, सुनें, प्रेम और भक्ति से आँखों में अश्रुपात होने लगता है|

08 जुलाई 2011

दोस्ती की मिठास

आषाढ शुक्ल प्रतिपदा महाकवी कालिदास की जयंती है ........आपने सुना ही होगा "आषाढस्य प्रथमे दिवसे..."

कालीदास के महान नाटक और मनोरम दृश्य - काव्य हमारी संस्कृती की धरोहर है | उनकी रचनाए अभीज्ञान शाकुन्तलम, मेघदूतम सब प्रसिद्ध ही है |

बस् आज कुछ ऐसा प्रस्तुत कर रहें हैं की आपको उस जमाने की याद आ जाएगी | कालीदास के सामने तो हम धूल भी नही है परंतु......मित्रता और प्रेम यह तो कालातीत सत्य हैं, कभी उन्होने लिखे थे, आज कोई और लिख रहा है,

तो कथा ऐसी है,