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25 मार्च 2011

श्यामा श्याम प्रेम गीत


नयी नवेली दुल्हन जैसी 
श्यामा मेरी सुंदर सखी 
श्याम संग रास खेले 
श्यामा मेरी प्यारी रानी 
रानी रानी तू हि रानी 
राधे रानी मेरी सखी 
श्यामा श्यामा हृदय पुकारे
श्यामाबिन मन कही न लागे 
श्याम मेरा पिया सखा तू
मै भी पुकारू श्याम श्याम रे 
श्याम तू मुझे तडपाये   
मेरा मन तुझमे हि लागे 
मेरा मन तेरा मन 
एक हृदय यह गीत गाये 
प्रेम गीत यह तेरे प्रेम का 
दुनिया मे हर कोई गाये 
क्या यह जादू तुने किया है 
मन बावरा तुझेहि पुकारे 
तेरे मिलन के आस मे 
तेरे प्रेम की प्यास मे 
दुनिया मै भुला बैठी 
फिर भी तु मुझे सताये 
सताना है प्यार तेरा 
दिल मेरा बात यह जाने 
कैसे तुने मोह लिया रे  
चैन मेरा छीन लिया रे 
श्याम सवेरे तुझे हि खोजू 
पनघट पे मै तुझे खोजू 
मिठी बोली कैसे तू बोले 
श्यामा मुझे तू मोह ले 
तेरी मोहीनी ऐसी रानी 
हृदय मे मेरे तू हि बोले 
जगमे जहां जहां भी जाऊं  
राधे राधे गाता रहूँ 
तुझ बिन मेरा श्वास न जाये 
राधे तू तो मुझे सताये 
तेरी मेरी प्रेम कहानी 
दुनिया इसे कभी न जाने

यह प्रेम गीत कभी समाप्त नहीं होगा, आगे फिर कभी देखेंगे कुछ और प्यारे प्यारे शब्दपुष्प ! 


4 टिप्‍पणियां:

  1. Yeh shabd pushp yun hi sunate rehna...
    Mujhe yahan aakar sukun milta hai:)

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  2. कितनी प्यारी बात कही आरती आपने ! आपका घर हि यह ब्लॉग, आण क्या यही रहिये ना ! आपके जैसे दोस्त हो तो और भी शब्दपुष्प चून चून के इस मंदिर मे लेते आयेंगे | दोस्त क्या भगवान से अलग है! :) मुझे बहुत हि अच्छा लगा, मेरे पास शब्द हि नही बचे बोलने के लिये ! :) :)

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  3. गीताजी आप तो ऐसी प्यारी बात बोलती है | क्या बोलु समज मे हि नही आता! sweet sweet शब्दपुष्प !

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