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26 मार्च 2011

प्रेमाभक्ती - एक नयी अभिव्यक्ती

प्रेमाभक्ति की हुई यह कैसी अभिव्यक्ति! 


प्रेमाभक्ति सब भुला देती है, 
आशा निराशा से परे आनंद देती है
जीवन में बस आनंद ही आनंद देती है
प्रेमा भक्ति यह सबसे न्यारी

25 मार्च 2011

श्यामा श्याम प्रेम गीत


नयी नवेली दुल्हन जैसी 
श्यामा मेरी सुंदर सखी 
श्याम संग रास खेले 
श्यामा मेरी प्यारी रानी 
रानी रानी तू हि रानी 
राधे रानी मेरी सखी 
श्यामा श्यामा हृदय पुकारे
श्यामाबिन मन कही न लागे 
श्याम मेरा पिया सखा तू
मै भी पुकारू श्याम श्याम रे 
श्याम तू मुझे तडपाये   
मेरा मन तुझमे हि लागे 
मेरा मन तेरा मन 
एक हृदय यह गीत गाये 
प्रेम गीत यह तेरे प्रेम का 
दुनिया मे हर कोई गाये 
क्या यह जादू तुने किया है 
मन बावरा तुझेहि पुकारे 
तेरे मिलन के आस मे 
तेरे प्रेम की प्यास मे 
दुनिया मै भुला बैठी 
फिर भी तु मुझे सताये 
सताना है प्यार तेरा 
दिल मेरा बात यह जाने 
कैसे तुने मोह लिया रे  
चैन मेरा छीन लिया रे 
श्याम सवेरे तुझे हि खोजू 
पनघट पे मै तुझे खोजू 
मिठी बोली कैसे तू बोले 
श्यामा मुझे तू मोह ले 
तेरी मोहीनी ऐसी रानी 
हृदय मे मेरे तू हि बोले 
जगमे जहां जहां भी जाऊं  
राधे राधे गाता रहूँ 
तुझ बिन मेरा श्वास न जाये 
राधे तू तो मुझे सताये 
तेरी मेरी प्रेम कहानी 
दुनिया इसे कभी न जाने

यह प्रेम गीत कभी समाप्त नहीं होगा, आगे फिर कभी देखेंगे कुछ और प्यारे प्यारे शब्दपुष्प ! 


21 मार्च 2011

होली खेली आज कान्हा संग

होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं ! मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रतिमा धुले के बी. ए. पी. एस. स्वामीनारायण मंदिर में विराजमान श्री घनश्याम महाराज की है श्री स्वामीनारायण भगवान का यह बाल - रूप है  मुझे अधिक तो पता नहीं, परन्तु मेरे लिए यह मेरे कान्हाजी हैं

कुछ लिखने आज चली थी
कान्हा ने भी बात कर ली 
मै तो हरख हरख पागल हुई 

08 मार्च 2011

मीरा बनू मै राधा बनू

महिला दिवस की आप सबको हार्दिक बधाई | हमेशा की तरह आज फिर से कुछ मेरे बारे में, जीवन के बारे में आप सब के साथ बाट रही हूँ | आपका क्या कहना है, इस सपने के बारे में ? 


मीरा बनू मै राधा बनू 
कान्हा तेरी मै प्रिया बनू ||
कृपा हो तेरी ऐसी मुझे, 
तेरी सदा मै प्रिया बनू ||
दुर्गा बनू मै काली बनू ,
असुरोको संहारनेवाली बनू || 
कृपा हो तेरी ऐसी मुझे,
तेरी गाथा मै गाती रहूँ ||


जो स्त्री मीरा, राधा जैसी सौम्य सुन्दर और  शांत है वह समय पड़ने पे दुर्गा या कालि बन सकती है, असुरोंका विनाश भी कर सकती है | असुर कौन है , मानवता का, स्त्री के स्त्रीत्व का अपमान करने वाले, मातृत्व का अपमान करनेवाले, भ्रूण हत्या करनेवाले, और तो क्या हर युवती एक मानव न होके सिर्फ एक शरीर है  यह माननेवाले | इन सबके विरुद्ध वह नारी दुर्गा है | 

यह बात पुरुषों और स्त्रियोने भी जाननी और माननी चाहिए |  हमारे विचार अगर बदले तो हर अन्याय , अत्याचार को होने से पहले ही रोका जा सकता है | 

और एक बात, केवल शरीर को महत्व देकर, युवतियोने अपनी अस्मिता और गरिमा को स्वत: ही नष्ट नहीं करना चाहिए | यह एक मानसिक गुलामी है | और शोषण भी | 

हम सब मानवता के पुजारी बने | मातृत्व के पुजारी बने | न की अंध वासना के शिकार बने | प्रेम में आदर होता है, वासना में अहंकार!

जीवन की सुन्दरता प्रेम और आदर के इन्ही आदर्शोंमे है | हम जिसे सभ्यता और आधुनिकता समझ रहे है , उसके पीछे भागते भागते हम जीवन की सुन्दरता और शांति भूल गए है | 

मेरा करोडो प्रणाम उन माताओं को जिन्होंने यह विश्व प्रेम, विश्वास, त्याग, समर्पण  से समृद्ध, सुन्दर और शांतिपूर्ण किया |

हे विश्ववन्द्य मात : मेरा तुझको सदैव नमन |

यह भावपुष्प मीरा , राधा, दुर्गा, काली, सरस्वती, सीता जैसी अनगिनत नारियोंको को, सच्ची देवियोको अर्पण! मातृत्व को अर्पण!